राजनांदगांव : छह प्रकार की भाजी से पूजे गए भगवान बलराम…
ग्राम छिराहीडीह में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक, लोकआस्था और कृषि संस्कृति से जुड़ा पावन पर्व कमरछठ (हलषष्ठी) भक्ति और पारम्परिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। माताओं-बहनों ने अपनी संतान के दीर्घायु, निरोगी काया, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना को लेकर पूरे नियम-निष्ठा के साथ निर्जला व्रत धारण किया। गांव के विभिन्न मोहल्लों में महिलाओं ने एकत्र होकर सगरी (छोटा तालाब) बनाकर पूजा-अर्चना की। माताओं ने कमरछठ माता और भगवान बलराम की विधि-विधान से पूजा की तथा अपनी संतानों के सिर पर लाई-कांसी घास से थपकी देकर उन्हें सुख-समृद्धि व आरोग्य का आशीर्वाद दिया।
रणजीत सिंह चंदेल ने कमरछठ पर्व की महिमा का बखान करते हुए कहा कि कमरछठ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्रकृति और कृषि व्यवस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। पंडित रज्जु तिवारी, सुधा सिंह,दुलाई बाई चंदेल ,पिंकी राजपुत कौशिल्या ठाकुर , पुष्पलता सिंह, लता यदु, रुक्मणी पटेल, कांति साहू, गणेशिया पटेल, उमा पटेल, इन्द्राणी राजपूत, निरोध यदु, परमीला पटेल, गीता मानिकपुरी, पार्वती पटेल, किरण यदु सवित्री यदु, चैति निषाद, भाना यादव, रमशीला यदु, तिजकुवर निषाद सहित अन्य लोग जुटे थे।
