उत्तर प्रदेशराज्‍य

साढ़े दस लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़े सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

By Admin|01 Sep 2026, 10:31 PM
f X W

लखनऊ

उत्तर प्रदेश के गांवों में स्वयं सहायता समूह अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला आत्मनिर्भरता के बड़े केंद्र बन रहे हैं। योगी सरकार के ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में सक्रिय 10.58 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर लगभग सवा करोड़ ग्रामीण परिवारों को आजीविका के नए अवसर मिले हैं। इन समूहों ने महिलाओं को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के साथ परिवारों की आय बढ़ाने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने का काम किया है। वहीं इन समूहों से जुड़ी 82 लाख से ज्यादा महिला किसान ग्रामीण बदलाव की नई अग्रदूत बनकर उभर रही हैं।

समूहों से निकली आत्मनिर्भरता की नई कहानी

ग्रामीण आजीविका मिशन का फोकस महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उन्हें प्रशिक्षण, ऋण, उद्यम और बाजार से जोड़कर स्थायी आय के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इसका असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, हस्तशिल्प और स्वच्छता उत्पादों के निर्माण सहित कई क्षेत्रों में छोटे उद्यम संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं के हाथ में कमाई आई है तो परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। घर की जरूरतों में योगदान देने के साथ महिलाएं अपने फैसले खुद लेने और दूसरे परिवारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।

बचत-ऋण के जरिये कारोबार तक पहुंचीं ग्रामीण महिलाएं

मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन की बड़ी उपलब्धि यह है कि महिलाओं को बचत और ऋण की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़ाकर उद्यमिता के अवसर दिए गए। प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ बाजार से जुड़ाव ने हजारों गांवों में छोटे-छोटे उद्योगों की नींव रखी है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपनी पहचान कारोबारी के रूप में बना रही हैं। महिला समूहों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं। एक महिला के उद्यमी बनने का असर उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समूह की दूसरी महिलाएं भी उससे प्रेरणा लेकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ती हैं।

READ ALSO  मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिला प्रतिनिधिमंडल, बोले- सबके साथ करेंगे न्याय

82 लाख महिला किसान बनीं बदलाव की वाहक
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र में भी उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है। 82 लाख महिला किसानों का जुड़ाव इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है। खेती से जुड़े काम में महिलाओं की भागीदारी को आय बढ़ाने वाले अवसरों से जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आजीविका के स्रोतों में विविधता आई है। महिला समूह अब गांवों में आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक बदलाव की भी मजबूत धुरी बन चुके हैं। समूहों में साथ काम करने से महिलाओं के बीच सहयोग और अनुभव साझा करने की संस्कृति मजबूत हुई है। सफल महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी रोजगार और उद्यम की राह दिखा रही हैं।

वित्तीय समावेशन से मजबूत हुई आर्थिक नींव

ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ना भी मिशन की अहम उपलब्धियों में शामिल है। वित्तीय समावेशन के जरिए महिलाओं को बचत, ऋण और अन्य आर्थिक अवसरों तक पहुंच मिली है। इससे गांवों में छोटी पूंजी के आधार पर कारोबार शुरू करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार का जोर अब इन समूहों को केवल समूह के रूप में सक्रिय रखने के बजाय उन्हें उद्यम, रोजगार और बाजार के अवसरों से जोड़कर आय के स्थायी स्रोत तैयार करने पर है। यही वजह है कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण विकास के साथ महिला सशक्तीकरण का भी प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं।

गांव की अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ऊर्जा
मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रदेश में साढ़े दस लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर रहा है। एक ओर इससे आजीविका के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की नई पहचान मिल रही है। ग्रामीण आजीविका का यह मॉडल आने वाले समय में गांवों में रोजगार और उद्यम के और अधिक अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।

READ ALSO  धीरेंद्र शास्त्री बोले- बेटियां दुर्गा और काली बनें, गरबा पंडाल में एंट्री को लेकर भी दिया संदेश
अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button