राजनांदगांव , खत्तर गच्छाधिपति मणिप्रभसागर जी शिष्य मुनि समयप्रभ सागर जी, मुनि श्रेयांशप्रभ सागर जी इन दिनों राजनांदगांव में विराजित हैं। उनका नियमित प्रवचन ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहा है। रविवार को श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि हमारे एक झूठ से किसी की जिंदगी भी बर्बाद हो सकती है इसलिए झूठ बोलने से पहले दस बार सोंचकर बोले।
कहा कि हमने किसी को कुछ कहा नहीं कि वो बात एक-दूसरे के पास से होती हुई जब आगे बढ़ती जाती है, तब वह झूठ का विशाल पुलंदा बन जाती है। यह झूठ किसी की जिंदगी भी बर्बाद कर देती है। माता सीता का उदाहरण देते हुए बताया कि एक झूठ ने उन्हें फिर से वन भेज दिया। कहा कि इस झूठ से भले ही किसी का लेना-देना ना हो लेकिन वह उसमें सहभागी अवश्य बनना चाहता है। वह यह नहीं सोचता कि उसके सहभागी बनने से किसी का जीवन तहस-नहस भी हो सकता है। मुनि ने कहा कि कर्मों का फल तो मिलकर ही रहता है। इसलिए अपने कर्म ऐसे करें कि जो अपने लिए आगे चलकर तकलीफदेह न हो और दूसरों के लिए भी नुकसानदायक ना हो।
जो कर्म में लिखा है उसे स्वीकार करना ही चाहिए हमें अच्छे विचार बहुत कम आते हैं। दरअसल अच्छे विचार हम अपने मन में लाते नहीं है। जो कर्म में लिखा है उसे स्वीकार करना ही चाहिए। एक झूठ में अयोध्या को एक सती से दूर कर दिया। कहा कि झूठ बोलने से कुछ मिलना नहीं है फिर भी हम इस संजोते हैं। कहा कि जहां जरूरत है वहां झूठ बोलना तो समझ में आता है लेकिन झूठ बोलने से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि अनावश्यक झूठ किसी की जिंदगी भी बर्बाद कर सकती है।
