फोरलेन पर ‘श्रेय’ की सियासत? DPR का टेंडर जून में ही जारी, फिर अगस्त में वही मांग लेकर गडकरी के पास पहुंचे सांसद संतोष पांडे
मार्च में विजय शर्मा ने धंवईपानी–सिमगा फोरलेन के लिए गडकरी को लिखा था पत्र, जून में कवर्धा–सिमगा हिस्से की DPR का टेंडर भी जारी; अब सांसद संतोष पांडे ने फिर फोरलेन बनाने की मांग रखी—सवाल, जब प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी थी तो नई मांग क्यों?

राजनांदगांव/कवर्धा।राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र में सड़क और रेल परियोजनाओं को लेकर एक बार फिर राजनीतिक श्रेय की चर्चा शुरू हो गई है। इस बार मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के धंवईपानी–चिल्फी–कवर्धा–सिमगा मार्ग को फोरलेन बनाने से जुड़ा है।
सांसद संतोष पांडे ने हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर धंवई, छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश सीमा से सिमगा तक फोरलेन निर्माण की मांग रखी है।
सांसद ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने बढ़ते यातायात, चिल्फी घाटी में जाम और सड़क की जरूरत को देखते हुए केंद्रीय मंत्री के सामने फोरलेन निर्माण का विषय रखा।लेकिन अब सामने आए पुराने पत्र, प्रकाशित खबर और DPR टेंडर संबंधी जानकारी के बाद सवाल उठ रहा है कि जिस परियोजना की प्रक्रिया महीनों पहले शुरू हो चुकी थी, उसे अगस्त में फिर नई मांग के रूप में क्यों प्रस्तुत किया गया?

1 मार्च को विजय शर्मा ने गडकरी को लिखा था पत्रछत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 1 मार्च 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को बाकायदा पत्र लिखकर इस मार्ग को फोरलेन करने की मांग की थी।पत्र में जबलपुर-मंडला-चिल्फी सेक्शन के लगभग 160 किलोमीटर हिस्से के फोरलेन होने के बाद बढ़ने वाले यातायात दबाव का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि आगे चिल्फी/धंवईपानी से सिमगा तक लगभग 122 किलोमीटर NH-30 सेक्शन को भी चार लेन में उन्नयन किया जाना आवश्यक है।
पत्र में चिल्फी घाटी के खतरनाक मोड़ों, भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा को भी प्रमुख कारण बताया गया था।2 मार्च को सामने आई थी फोरलेन स्वीकृति की खबरइसके अगले ही दिन 2 मार्च 2026 को प्रकाशित समाचार में दावा किया गया था कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

समाचार की हेडलाइन थी—“धंवईपानी से कवर्धा-सिमगा तक रोड होगी फोरलेन”अर्थात मार्च की शुरुआत में ही फोरलेन परियोजना को लेकर राजनीतिक और विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी थी।
अब सबसे महत्वपूर्ण तथ्य—10 जून को DPR का टेंडर भी जारीअब सामने आई एक और जानकारी इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना देती है।उपलब्ध दस्तावेज/स्क्रीनशॉट के अनुसार कवर्धा से सिमगा NH-30 फोरलेन परियोजना की DPR तैयार करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की ओर से 10 जून 2026 को टेंडर जारी किया गया था।

इसमें—टेंडर प्रकाशित होने की तारीख: 10 जून 2026बोली जमा करने की अंतिम तारीख: 8 अगस्त 2026, दोपहर 3 बजेबिड खोलने की तारीख: 10 अगस्त 2026, शाम 4 बजेविभाग: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), क्षेत्रीय कार्यालय रायपुरबताया गया है।यानी यदि यह टेंडर विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप है,
तो सांसद संतोष पांडे की नितिन गडकरी से हालिया मुलाकात से करीब दो महीने पहले ही परियोजना की DPR तैयार करने की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।फिर अगस्त में फोरलेन की ‘मांग’ क्यों?यही वह बिंदु है जिस पर अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा हो रहा है।जब मार्च में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उसी मार्ग के फोरलेन के लिए केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखा, उसके बाद स्वीकृति संबंधी खबर सामने आई और फिर 10 जून को DPR के लिए टेंडर तक जारी हो गया, तो अगस्त में सांसद संतोष पांडे द्वारा केंद्रीय मंत्री से मिलकर उसी फोरलेन की मांग करना आखिर किस चरण की पहल है?
क्या सांसद परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए गडकरी से मिले थे?या उन्हें टेंडर जारी होने के बावजूद परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं थी?या फिर पहले से आगे बढ़ चुकी परियोजना पर एक बार फिर राजनीतिक श्रेय हासिल करने की कोशिश की जा रही है?

इन सवालों का जवाब अब सांसद को स्पष्ट करना चाहिए।मांग नहीं, DPR तक पहुंच चुकी थी परियोजनायहां फर्क समझना भी जरूरी है।किसी सड़क को फोरलेन बनाने के लिए पहले मांग और प्रारंभिक सहमति होती है। इसके बाद सर्वे, यातायात अध्ययन, अलाइनमेंट, लागत अनुमान और भूमि संबंधी विवरण तैयार करने के लिए DPR यानी Detailed Project Report बनाई जाती है।अगर DPR तैयार करने के लिए टेंडर जून में जारी हो चुका था, तो इसका मतलब यह है कि परियोजना महज राजनीतिक मांग के शुरुआती स्तर पर नहीं थी, बल्कि तकनीकी अध्ययन की औपचारिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुकी थी।ऐसे में अगस्त की मुलाकात को यदि केवल “फोरलेन बनाने की मांग” बताया जाता है तो जनता के सामने परियोजना का पूरा पुराना घटनाक्रम रखना भी जरूरी है।
रेल परियोजना में भी उठ चुका है श्रेय का सवाल संतोष पांडे को लेकर इससे पहले भी बड़ी परियोजनाओं पर इसी तरह के राजनीतिक सवाल उठ चुके हैं।राजनांदगांव क्षेत्र से जुड़ी रेल परियोजना के मामले में भी यह चर्चा सामने आई थी कि जिस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2018 में हो चुका था, उसे 2026 में फिर नए सिरे से उपलब्धि के रूप में पेश करने का प्रयास किया जा रहा है।रेल परियोजना के बाद अब सड़क परियोजना में भी लगभग वैसी ही स्थिति दिखाई दे रही है—पुरानी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, लेकिन उसके बाद नई मुलाकात को फिर एक बड़ी मांग के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
जनता को तस्वीर नहीं, परियोजना की वास्तविक स्थिति बताइएजनता को इस बात से अधिक मतलब है कि परियोजना का श्रेय किस नेता को मिलता है, या इस बात से कि फोरलेन सड़क वास्तव में कब बनेगी?
अब जनप्रतिनिधियों को बताना चाहिए कि—DPR का टेंडर किस कंपनी को मिला?DPR कितने महीने में तैयार होगी?फोरलेन की अनुमानित लागत कितनी होगी?भूमि अधिग्रहण कितना होगा?अंतिम निर्माण स्वीकृति कब मिलेगी?निर्माण का टेंडर कब निकलेगा?और जमीन पर काम कब शुरू होगा?क्योंकि राजनीतिक मुलाकातों और फोटो से अधिक महत्वपूर्ण जनता के लिए सड़क का निर्माण है।
सांसद संतोष पांडे से 5 सीधे सवाल
1. क्या सांसद को जानकारी थी कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा मार्च में ही धंवईपानी–सिमगा फोरलेन का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री के सामने रख चुके हैं?
2. क्या उन्हें यह जानकारी थी कि कवर्धा–सिमगा फोरलेन की DPR के लिए 10 जून 2026 को टेंडर जारी हो चुका है?
3. जब DPR टेंडर की अंतिम तारीख 8 अगस्त थी, तो उससे ठीक पहले केंद्रीय मंत्री से मिलकर उसी फोरलेन की नई मांग रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
4. क्या सांसद ने गडकरी से केवल मांग की या परियोजना की DPR, वित्तीय स्वीकृति और निर्माण समयसीमा पर कोई ठोस निर्णय भी लिया गया?
5. रेल परियोजना के बाद सड़क परियोजना में भी पुरानी प्रक्रिया को नई उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के आरोप क्यों लग रहे हैं?
