छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : पहले तो हम शराब को पीते हैं फिर शराब हमें पीने लगती है…

By lokesh sharma|06 Aug 2026, 1:26 PM
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राजनांदगांव , जैन मुनि समयप्रभ सागर ने कहा कि व्यक्ति पहले सोचता है कि वह शराब पी रहा है किंतु बाद में उसे शराब पीने लगती है। कहा कि इससे बचने के लिए हमारे भीतर पचकान (उपवास का संकल्प) लेने का साहस होना चाहिए। पचकान का जीवन में प्रवेश हो तो उससे मत घबराओ, उसे स्वीकार करो और दृढ़तापूर्वक उसका सामना करो।

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उन्होंने कहा कि पचकान लेने से आत्म शुद्धि होती है। मन में दृढ़ता की भावना आती है और हम व्यसन से मुक्त रह सकते हैं। आज की धर्म सभा को श्रेयांशप्रभ सागर जी ने भी संबोधित किया। कहा कि हमें हिंसा से बचना चाहिए। हिंसा कई तरह से होती है। इनमें से एक भाव हिंसा भी है। हम सुबह सोकर उठने से लेकर रात्रि सोते तक अनेकों बार हिंसा कर चुके होते हैं किंतु हम इसका मनन नहीं करते। कहा कि किसी को ठेस पहुंचाना भी हिंसा है। हम कहते हैं कि हम अहिंसक हैं, हम किसी जीव पर हिंसा नहीं करते फिर भी हम भाव से हिंसा कर देते हैं।

अनावश्यक हिंसा से हमें बचाना चाहिए: मुनि श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि हम अपने द्वारा की गई हिंसा को संस्कारों का नाम देकर बचाना चाहते हैं, किन्तु क्या आप अंतर मन से बोल सकते हैं कि हम यह जानबूझकर नहीं कर रहे हैं। कहा कि आवश्यक हिंसा तो ठीक है किंतु अनावश्यक हिंसा से हमें बचाना चाहिए।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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