छत्तीसगढ़

नई गाइडलाइन पर शिक्षा जगत असहमत: प्राचार्यों पर बढ़े बोझ को लेकर विरोध तेज

By Admin|21 Nov 2025, 10:31 PM
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रायपुर

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आवारा कुत्तों पर नियंत्रण को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों का शिक्षकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्कूल परिसरों में कुत्तों की एंट्री रोकने की जिम्मेदारी सीधे प्राचार्यों पर डाल दी गई है, जिसे शिक्षक संघ ने “अतिरिक्त और अव्यावहारिक बोझ” बताते हुए वापस लेने की मांग की है.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों को सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए हैं. इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन ने आधा दर्जन से अधिक विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित पत्र जारी किया है.

राज्य शासन ने सभी विभागों को आदेश जारी करते हुए सरकारी व प्राइवेट स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की एंट्री रोकने के काम में लगा दिया है. इसके लिए 7 दिन के भीतर ऐसे स्थानों की पहचान कर फेंसिंग, गेट और अन्य सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे, जहां आवारा कुत्ते घुस जाते हैं. हर स्थान के लिए एक नोडल अफसर की नियुक्ति भी की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बड़ा अभियान
पहले चरण में स्कूलों के प्राचार्य, अस्पतालों के सीएमओ/अधीक्षक, बस स्टैंड/स्टेशन के मैनेजर अपने परिसर में कुत्तों की एंट्री के रास्तों की पहचान करेंगे और उन्हें रोकने के उपाय करेंगे. जरूरत पड़ने पर अन्य शासकीय विभागों से सहयोग भी लिया जाएगा. नोडल अफसर इस बात की निगरानी करेंगे कि कुत्तों की एंट्री पूरी तरह बंद रहे और वे परिसर के आसपास भी न भटकें.

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विभागों की जिम्मेदारी तय:
पशुधन विकास विभाग

    आवारा कुत्तों की नसबंदी
    आरक्षित आश्रय स्थलों पर पशु चिकित्सक की नियुक्ति

स्वास्थ्य विभाग

    सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना

लोक निर्माण विभाग (PWD)

    कुत्तों की एंट्री वाले स्थानों की पहचान
    फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल और गेट का निर्माण

शिक्षा विभाग

    सभी स्कूलों में छात्रों व कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था
    कुत्तों के काटने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराना

नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत

    हर तीन महीने में निरीक्षण कर कुत्तों की एंट्री बंद होने की पुष्टि
    आवारा कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी की व्यवस्था
    कुत्तों के लिए बाड़ा, चिकित्सक और देखभाल कर्मचारियों की नियुक्ति
    प्रत्येक वार्ड में कुत्तों के लिए भोजन स्थलों की व्यवस्था
    लोगों को स्ट्रीट डॉग गोद लेने के लिए प्रेरित करना

खेल मैदान प्रबंधन

    आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने सुरक्षा या ग्राउंड कीपिंग स्टाफ की तैनाती

शिक्षकों पर नई जिम्मेदारी, संगठन ने जताया कड़ा विरोध

इन निर्देशों में स्कूल प्राचार्यों को परिसर में आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने, फेंसिंग की निगरानी, साफ-सफाई से लेकर अप्रिय घटना होने पर जिम्मेदारी संभालने जैसे कार्य सौंपे गए हैं. इस पर शालेय शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है.

संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा- “शिक्षकों पर पहले से ही शैक्षणिक कार्यों के अलावा कई गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां हैं. अब आवारा कुत्तों को भगाने और सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी देना न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि शिक्षकों पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है. किसी अप्रिय घटना की स्थिति में संस्था प्रमुख को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है.”

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उन्होंने मांग की कि यह निर्णय तुरंत वापस लिया जाए और आवारा कुत्तों के नियंत्रण की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी जाए, जो इसका विशेषज्ञ विभाग है.

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