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कल आएगी लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त, ₹1500 के साथ 3-4 लाख तक कमाई वाली नई पहल की तैयारी

By Admin|11 Jul 2026, 8:05 PM
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भिंड

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मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई रविवार को भिंड के दौरे पर रहेंगे। वे यहां लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त जारी करने आ रहे हैं। बता दें कि इस बार लाड़ली बहना योजना की किस्त के 1500 रुपए की राशि भेजने और बहनों के साथ संवाद का कार्यक्रम भिंड जिले के लहार में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के बाद सीएम लहार में भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा के घर जाएंगे, जहां वे मातृ शोक व्यक्त करने पहुंचेंगे।

पहले महेगांव से भेजने वाले थे 1500 रुपए

बता दें कि लाड़ली बहना योजना की 1500 रुपए राशि भेजने का कार्यक्रम पहले मेहगांव के मंडी परिसर में होना तय था।  मंत्री राजेश शुक्ला, कलेक्टर किरोड़ीलाल मीना समेत जिले के अन्य अधिकारियों और जन्मप्रतिनिधियों के जायजे के बाद और बारिश की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम का स्थल को बदला गया है।

लहार में दो घंटे का कार्यक्रम (Ladli Behna Yojana 38th installment)
जानकारी के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव लहार में दो घंटे रुकेंगे। लाडली बहना योजना का कार्यक्रम (Ladli Behna Yojana Program) यहां 1 बजे शुरू होकर 3 बजे संपन्न होगा। लहार में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गईं। वहीं विधायक अम्बरीश ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक को लेकर भी दिशा-निर्देश दे दिए हैं।

प्रदेश की लाड़ली बहनों को नई सौगात देने की तैयारी
मोहन सरकार ने प्रदेश में लखपति गोपालक दीदी योजना (Ladli Behna Yojana and lakhpati gopalak didi yojana) शुरू की है। इसमें महिलाओं को मुफ्त में दुधारू नस्ल की गाय व भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए अलग से बजट जरूरी नहीं होगा, बल्कि हितग्राहियों के घरों में गैर नस्लीय गाय-भैसों की पहचान कर उनका कृत्रिम तकनीक से उच्च नस्ल से गर्भाधान कराया जाएगा। इस तरह उच्च नस्ल की बछिया और पड़िया का जन्म होगा और नस्ल सुधार के जरिए बहनाओं के घरों में अच्छी नस्ल के दुधारू मवेशी तैयार होंगे।

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प्रारंभिक चरण में सरकार का दावा है कि इस तरह महिलाओं के घरों में उच्च नस्ल की गाय और भैंसों से अतिरिक्त दूध मिलेगा, सालाना 3 से 4 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी।

कैसे मिलेगा योजना का लाभ?

– अब ज्यादा फोकस गैर नस्लीय मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान पर होगा। विकासखंडों को लक्ष्य दिए।

– प्रशिक्षण सत्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी, गैर नस्लीय मवेशियों की पहचान के लिए अभियान चलाया जाएगा।

– जो मैदानी अमला काम नहीं कर रहा, उन्हें हटाया जाएगा। कृत्रिम गर्भाधान किट वापस लेने होंगे।

– विकासखंड स्तर पर दक्षता मूल्यांकन समिति होंगी, इसमें हर माह समीक्षा होंगी। प्रत्येक पंचायत में एक मैत्री कार्यकर्ता होने चाहिए।

गांव की अर्थव्यवस्था को बदलने का मॉडल
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि यह योजना केवल एक डेयरी विकास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदलने का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक मॉडल है। इसके लिए प्रत्येक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। मासिक समीक्षा करेंगे। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में यह बेहद असरदार होगी।

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