छत्तीसगढ़

राजनांदगांव में पार्षद की जीत के बाद बवाल, ‘मुझे पिता बताने’ वाले दावे पर सामने आया बड़ा बयान

By Admin|09 Jul 2026, 2:11 PM
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खैरागढ़.

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राजनांदगांव जिले के नगर पंचायत घुमका के वार्ड क्रमांक-14 से महज एक वोट से चुनाव जीतने वाले पार्षद संतोष गंधर्व की पहचान और जाति प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। खैरागढ़ जिले के ग्राम सिरसाही निवासी जगन्नाथ गंधर्व ने ठेलकाडीह थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि संतोष उनका पुत्र नहीं है।

इसके बावजूद कथित रूप से उनका नाम पिता के रूप में दर्ज कर दस्तावेज तैयार कराए गए और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा गया। दूसरी ओर, संतोष गंधर्व ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बचपन से लेकर आज तक उनके सभी सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में जगन्नाथ गंधर्व का ही नाम पिता के रूप में दर्ज है और चुनाव हारने वाले लोग राजनीतिक साजिश के तहत विवाद खड़ा कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता का दावा
शिकायतकर्ता जगन्नाथ गंधर्व के मुताबिक, उन्हें पूरे मामले की जानकारी तब मिली, जब घुमका से कुछ लोग उनके गांव सिरसाही पहुंचे और पूछा कि क्या संतोष उनका बेटा है। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके नाम से जुड़े पुराने स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर दस्तावेज निकाले गए और उन्हीं का उपयोग जाति प्रमाण पत्र बनवाने में किया गया। उनका दावा है कि उन्होंने कभी संतोष को अपना पुत्र नहीं माना और न ही वे उसे जानते हैं। उन्होंने पुलिस से जन्म रिकॉर्ड, परिवार रजिस्टर, स्कूल दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र और अन्य अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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चुनाव जीतने के बाद विवाद खड़ा होना राजनीतिक साजिश का हिस्सा- पार्षद
वहीं संतोष गंधर्व का कहना है कि उनकी मां और जगन्नाथ गंधर्व का विवाह हुआ था, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए। उनके अनुसार, परिवार में तीन भाई और दो बहन हैं तथा बचपन से आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल रिकॉर्ड सहित सभी दस्तावेजों में जगन्नाथ गंधर्व का नाम ही पिता के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कोई फर्जी दस्तावेज नहीं बनवाया और यदि रिकॉर्ड गलत होता तो वर्षों पहले ही उस पर आपत्ति उठ जाती। अब चुनाव जीतने के बाद विवाद खड़ा होना राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्कूल से दस्तावेज गलत जानकारी देकर हासिल किए गए, जबकि संतोष का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को लिखित आवेदन देकर चुनाव लड़ने की जानकारी दी थी और पहचान के लिए आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि ठेलकाडीह पुलिस उनका बयान दर्ज कर चुकी है और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग दिया है।

एक वोट की जीत के बाद बढ़ा विवाद
संतोष गंधर्व वार्ड क्रमांक-14 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में केवल एक वोट के अंतर से चुनाव जीते थे। उनका आरोप है कि चुनाव में हार का सामना करने वाले लोग अब इस मामले को राजनीतिक रंग देकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पुलिस के साथ-साथ अन्य वैधानिक स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है।

दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग
फिलहाल दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। एक ओर शिकायतकर्ता स्वयं को संतोष का पिता मानने से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संतोष का दावा है कि बचपन से सभी सरकारी दस्तावेजों में वही उनके पिता के रूप में दर्ज हैं। ऐसे में अब पुलिस जांच, जन्म संबंधी रिकॉर्ड, परिवार रजिस्टर, पुराने स्कूल अभिलेख, जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और चुनाव में प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला फर्जी पहचान और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का है या फिर चुनावी जीत के बाद उभरा एक पुराना पारिवारिक विवाद। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।

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