उत्तर प्रदेशराज्‍य

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, यूपी स्टार्टअप मिशन और नई नीति को मंजूरी

By Admin|07 Jul 2026, 9:21 PM
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लखनऊ
 उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा नवाचार और स्टार्टअप हब बनाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को स्वीकृति दे दी गई।

नई नीति के तहत 1000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड, 400 करोड़ रुपये का एकेटीयू कार्पस फंड और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन स्थापित किया जाएगा।

इससे प्रदेश में नवाचार आधारित उद्योगों को गति मिलेगी, 50 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनेंगे और ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। कैबिनेट में 28 प्रस्तावों में से 27 को स्वीकृति मिली, जबकि मदरसा शिक्षकों की ग्रेच्युटी से संबंधित प्रस्ताव वापस ले लिया गया

कैबिनेट के बाद आइटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। नई नीति में स्टार्टअप्स को आइडिया से लेकर विस्तार तक हर चरण में वित्तीय और संस्थागत सहायता मिलेगी।

भरण पोषण भत्ता (सस्टेनेंस अलाउंस) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। प्रोटोटाइप अनुदान पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये, जबकि सीड फंडिंग 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है।

विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक दी जा सकेगी। स्टार्टअप्स के लिए पांच करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, दो करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, ईपीएफ एवं ईएसआइ अंशदान की प्रतिपूर्ति, क्लाउड सेवाओं पर दो लाख रुपये तक सहायता व पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए दो करोड़ रुपये तक की प्रतिपूर्ति का प्रविधान किया गया है।

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इसके साथ ही फंड आफ फंड्स, बैंक फंडिंग और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलाजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक सहित अन्य उभरती तकनीकों पर आधारित डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष पैकेज मिलेगा।

ऐसे स्टार्टअप्स को 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल व अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। 20 नए सेंटर आफ एक्सीलेंस (सीओई) स्थापित किए जाएंगे। इनकी सहायता राशि 10 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है।

साथ ही राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब स्थापित होगा, जो स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, उद्योग सहयोग, निवेश, मेंटरशिप और अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

इन्क्यूबेटर्स के लिए पूंजीगत अनुदान एक करोड़ से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये व पूर्वांचल और बुंदेलखंड के इन्क्यूबेटर्स के लिए 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। परिचालन अनुदान 30 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष कर दिया गया है।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। प्रदेश में एंजेल निवेशकों, वेंचर कैपिटल फंड, हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) और हाई नेटवर्थ फैमिली (एचएनएफ) को जोड़कर राज्य स्तरीय निवेशक नेटवर्क बनाया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 100 करोड़ रुपये की निजी पूंजी स्टार्टअप्स तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

एकेटीयू इनोवेशन हब को सुदृढ़ करने, ओडीओपी को स्टार्टअप्स से जोड़ने तथा एनआरआई कनेक्ट के जरिये निवेश और वैश्विक नेटवर्किंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। स्टार्टअप वीक, स्टार्टअप सिंपोजियम, ग्रैंड चैलेंज, बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, स्टार्टअप मेले, हैकाथान और नवाचार जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्टार्टअप संस्कृति गांवों और छोटे शहरों तक पहुंच सके।

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नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चार स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। स्टीयरिंग कमेटी नीति को दिशा देगी, सशक्त समिति वित्तीय एवं नीतिगत निर्णय लेगी, पालिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) अनुदान वितरण और निगरानी करेगी व स्टार्टअप रिव्यू कमेटी आफ एक्सपर्ट्स (एसआरसीई) तकनीकी मूल्यांकन करेगी।

इसके अलावा सलाहकार समिति और स्टार्टअप मिशन निदेशालय का गठन भी होगा। अधिसूचना जारी होने के बाद नीति लागू कर दी जाएगी।

स्टार्टअप मिशन होगा नोडल एजेंसी
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत स्वायत्त संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा।

आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करने वाला यह मिशन स्टार्टअप नीति के क्रियान्वयन, स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स और सेंटर आफ एक्सीलेंस के समन्वय, अनुदान वितरण, स्टार्टइनयूपी पोर्टल, एमआईएस व डिजिटल प्लेटफार्म के संचालन, निवेश आकर्षित करने, उद्योग और शिक्षण संस्थानों से साझेदारी, शिकायत निवारण तथा नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण का कार्य करेगा।

मिशन के प्रशासनिक ढांचे में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाला गवर्निंग बोर्ड, कार्यकारी समिति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), महाप्रबंधक, प्रशासनिक टीम और परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) शामिल होंगे।

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