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MP सरकार का बड़ा फैसला: वक्फ बोर्ड में पहली बार शामिल हुए 2 हिंदू सदस्य, मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को मिली जिम्मेदारी

By Admin|06 Jul 2026, 12:23 PM
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भोपाल 

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मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्य शामिल किए गए हैं। यह कदम संशोधित कानून के तहत किए गए बदलावों के बाद उठाया गया है, जो गैर-मुस्लिम सदस्यों को राज्य वक्फ बोर्ड का हिस्सा बनने की अनुमति देता है।

वक्फ बोर्ड का किया गया है पुनर्गठन
मध्य प्रदेश सरकार ने 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सांवर पटेल को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया है। बोर्ड में मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव हिंदू सदस्य के रूप में शामिल हैं, जिससे यह संशोधित अधिनियम के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने वाला देश का पहला राज्य स्तरीय वक्फ बोर्ड बन गया है।

नए वक्फ बोर्ड की अधिसूचना रविवार को गजट में जारी की गई। एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “मध्य प्रदेश नए अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।”

इनको दी गई है जगह
बोर्ड में अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के अतिरिक्त पहले से सदस्य नजमा हेपतुल्ला, भोपाल उत्तर से विधायक आतिफ अकील, उज्जैन के रहने वाले फैजान खान, इंदौर की फातिमा चौधरी, बैरसिया भोपाल की पार्षद शाइस्ता सुल्तान, रतलाम की पार्षद शबाना खान और हिंदू सदस्यों में इंदौर के मनोज मालपानी और राघवगढ़ (गुना) के अनिमेष भार्गव को बोर्ड में सदस्य बनाया है।

इसके पहले विधायक के नाते आरिफ अकील सदस्य थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे आतिफ अकील को जगह दी गई है। स्टेट बार काउंसिल का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही अध्यक्ष और सभी 10 सदस्य हो जाएंगे।

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वक्फ बोर्डों को और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया था ये संसोधन
उल्लेखनीय है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता, महिलाओं व गैर-मुसलमानों की भागीदारी और संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण के लिए लाया गया एक प्रमुख कानून है।

कौन हैं मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव
मनोज मालपानी इंदौर के रहने वाले हैं और लंबे समय से सामाजिक के साथ-साथ सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. वे अलग-अलग सामाजिक संगठनों में एक्टिव रोल निभाते रहे हैं. इसके अलावा वे कई धार्मिक और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों में भी भाग लेते रहे हैं. उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें वक्फ बोर्ड का मेंबर बनाया है. वहीं, अनिमेश भार्गव गुना के राघौगढ़ निवासी हैं. वे भी सामाजिक और सार्वजनिक कार्यों में एक्टिव रहे हैं. स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है. वे लंबे समय से जनहित के मुद्दों पर काम करते रहे हैं. उनकी सक्रियता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें भी वक्फ बोर्ड में सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

वक्फ बोर्ड क्या है?
वक्फ अधिनियम, 1995 (2025 में संशोधित) की धारा 13(1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने अधिनियम की धारा 14 के प्रावधानों के अनुसार बोर्ड का गठन किया। वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है जो राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और संरक्षण के लिए जिम्मेदार है।

वक्फ की ज़िम्मेदारियों में वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड रखना, उनके इस्तेमाल और उनसे होने वाली आय की देखरेख करना, उन्हें कब्ज़े से बचाना और यह पक्का करना शामिल है कि उनका इस्तेमाल धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण के कामों के लिए हो। चेयरमैन संवार पटेल के अलावा नए बने बोर्ड में नई दिल्ली से नज़मा हेपतुल्ला, भोपाल से आतिफ अकील, उज्जैन से फ़ैज़ान खान, इंदौर से फ़ातिमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान, शबाना खान, इंदौर से मनोज मालपानी और गुना के राघोगढ़ से अनिमेष भार्गव शामिल हैं। पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कमिश्नर इसके पदेन सदस्य होंगे।

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राज्य सरकार के अनुसार नज़मा हेपतुल्ला को वक्फ़ एक्ट, 1995 (2013 में संशोधित) की धारा 14 के तहत 19 अप्रैल, 2023 को जारी नोटिफिकेशन के जरिए चुने गए सदस्यों की श्रेणी में नियुक्त किया गया था। वह18 अप्रैल, 2028 तक सदस्य बनी रहेंगी। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इसलिए उनके कार्यकाल के बचे हुए समय के लिए उन्हें नए बोर्ड में भी शामिल रखा गया है।

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