छत्तीसगढ़

सागौन की खेती बनी मुनाफे का सौदा, किसान को मिला लाखों का प्रोत्साहन

By Admin|22 May 2026, 6:33 PM
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रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) एवं निजी भूमि पर वृक्षारोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की इसी दूरगामी पहल का एक बेहद सफल और प्रेरणादायी परिणाम बालोद जिले के किसान अनिल जाजू की सफलता के रूप में सामने आया है।

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नवा रायपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम पलारी (तहसील गुरूर) निवासी कृषक अनिल जाजू को उनकी निजी भूमि पर तैयार किए गए सागौन वृक्षों के एवज में 9.69 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया। 

एग्रोफॉरेस्ट्री और जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के जोखिमों से उबारने के लिए वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है।  उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का मजबूत माध्यम बन रही है। साथ ही एक पेड़ माँ के नाम अभियान के जरिए जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ निर्माण को भी गति मिल रही है।

'एक पेड़ माँ के नाम अभियान
वन मंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अब जनभागीदारी से पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने की मुहिम को एक नई और अभूतपूर्व गति मिल रही है। 24 वर्षों की मेहनत का  फल मीठा मिला, किसान अनिल जाजू की यह सफलता अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन केस-स्टडी है। वर्ष 2001 में अपनी 3.35 हेक्टेयर निजी भूमि पर सागौन के पौधे लगाए थे। लगभग 24 वर्षों तक देखरेख और संरक्षण के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने वृक्ष कटाई नियम 2022 के तहत अनुमति लेकर सागौन वृक्षों की कटाई कराई। वन विभाग की देखरेख में कुल 173 सागौन वृक्षों की कटाई की गई, जिससे 949 नग लकड़ी प्राप्त हुई। इसका कुल आयतन 33.24 घनमीटर दर्ज किया गया। वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर लकड़ी का क्रय किया गया और इसके बदले लगभग 9.69 लाख रूपए की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कराई गई।

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’पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि का अनूठा संगम’
जाजू की यह शानदार सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाए, तो यह किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि प्रदेश के हरित आवरण में भारी वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन के खतरों से लड़ने में मदद मिलती है। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण होता है। किसानों को वन विभाग का निरंतर सहयोग मिलता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाले इच्छुक किसानों को पौधों के चयन से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशासनिक प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता लगातार मुहैया कराई जा रही है। शासन का मुख्य ध्येय यही है कि अधिक से अधिक किसान एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल को अपनाएं और अपनी बंजर या खाली जमीनों को मुनाफे के जंगल में बदल सकें।

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