DPR छत्तीसगढ समाचारधमतरी जिला

CG : तहसील नहीं, अब गांव में हो रही सुनवाई: लिंक कोर्ट से बदल रही डूबान क्षेत्र की तस्वीर

By kadwaghut|05 Jun 2026, 4:38 PM
f X W

हेम नारायण और ओंकार साहू  के वर्षों पुराना भूमि अभिलेख हुआ सुधार 
राजस्व सेवाएं अब ग्रामीणों के करीब, लिंक कोर्ट से बच रहा समय और धन

धमतरी,

तहसील नहीं, अब गांव में हो रही सुनवाई: लिंक कोर्ट से बदल रही डूबान क्षेत्र की तस्वीर
तहसील नहीं, अब गांव में हो रही सुनवाई: लिंक कोर्ट से बदल रही डूबान क्षेत्र की तस्वीर

प्रशासनिक सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाने की दिशा में धमतरी जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘लिंक कोर्ट’ दूरस्थ और डूबान प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। कभी छोटे-छोटे राजस्व मामलों के लिए कई किलोमीटर की यात्रा कर तहसील या जिला मुख्यालय पहुंचने को मजबूर ग्रामीण अब अपने ही गांव में त्वरित सुनवाई और समाधान पा रहे हैं।


   राज्य शासन की मंशा के अनुरूप कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले के दुर्गम क्षेत्रों में लिंक कोर्ट की शुरुआत की गई। विकासखंड नगरी के बोरई और विकासखंड धमतरी के अकलाडोंगरी में संचालित ये लिंक कोर्ट ग्रामीणों को राजस्व सेवाएं उनके घर के समीप उपलब्ध करा रहे हैं। गुरुवार को अकलाडोंगरी लिंक कोर्ट के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने स्वयं ग्रामीणों से चर्चा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया देखी।
    कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि दूरस्थ एवं डूबान प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को राजस्व सेवाओं की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। लिंक कोर्ट के माध्यम से नामांतरण, सीमांकन, खाता विभाजन और अभिलेख सुधार जैसे मामलों का समयबद्ध निराकरण हो रहा है, जिससे लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है।


   लिंक कोर्ट की उपयोगिता उस समय और स्पष्ट हुई जब ग्राम तांसी निवासी हेमनारायण बजरंग से जुड़े एक जटिल नामांतरण प्रकरण का समाधान स्थानीय स्तर पर किया गया। भूमि अभिलेख में दर्ज अनेक हितबद्ध पक्षकारों के बयान और आवश्यक प्रक्रियाएं गांव में ही पूरी कर ली गईं। पहले ऐसे मामलों में बार-बार तहसील कार्यालय जाना पड़ता था, लेकिन अब पूरी कार्यवाही ग्रामीणों की सुविधा के अनुरूप संपन्न हो रही है।
   इसी प्रकार ग्राम अकलाडोंगरी के ओंकार साहू का वर्षों पुराना भूमि अभिलेख सुधार का मामला भी लिंक कोर्ट के माध्यम से सुलझा। वर्ष 2011 में खरीदी गई भूमि का नामांतरण विभिन्न कारणों से लंबित था। लिंक कोर्ट में सभी पक्षों की सुनवाई कर राजस्व अभिलेख में आवश्यक सुधार किया गया और कलेक्टर मिश्रा ने स्वयं सुधार पत्रक सौंपा।

READ ALSO  CG : अंतिम संस्कार को लेकर 5 घंटे हंगामा, VHP-बजरंग दल कार्यकर्ता भी पहुंचे ...


   आज की कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 12 हितबद्ध पक्षकारों वाले जटिल एवं विवादित नामांतरण प्रकरण का स्थानीय स्तर पर समाधान रहा। सभी पक्षकारों के बयान मौके पर दर्ज किए गए, जिससे वर्षों से लंबित प्रक्रिया को गति मिली और शीघ्र निराकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  लिंक कोर्ट केवल राजस्व विवादों के समाधान का मंच नहीं, बल्कि सुशासन की उस अवधारणा का सशक्त उदाहरण है जिसमें प्रशासन स्वयं नागरिकों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करता है।

इससे ग्रामीणों का समय, श्रम और आर्थिक व्यय बच रहा है, वहीं प्रशासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हो रहा है।
  प्रत्येक गुरुवार को अकलाडोंगरी और प्रत्येक शुक्रवार को बोरई में नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे लिंक कोर्ट अब ग्रामीणों के लिए न्याय और प्रशासनिक सुविधा के नए केंद्र बन गए हैं। गांव में ही त्वरित सुनवाई और सरल प्रक्रिया से संतुष्ट ग्रामीणों ने जिला प्रशासन की इस जनोन्मुखी पहल की सराहना करते हुए कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया।


   दूरस्थ अंचलों में प्रशासन की यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि जब शासन और प्रशासन जनसरोकारों को केंद्र में रखकर कार्य करते हैं, तब न्याय और सेवाएं केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि लोगों के घर-आंगन तक पहुंचती हैं। यही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins