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CG : सरकार से 7 लाख की सहायता जारी, हृदय रोगी बच्चे को मिली नई जिंदगी …

By kadwaghut|04 Jun 2026, 4:10 PM
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बिलासपुर। समय पर बीमारी की पहचान और त्वरित चिकित्सा सहायता किसी बच्चे की जिंदगी बचा सकती है। इसका ताजा उदाहरण बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड में देखने को मिला, जहां चिरायु टीम की सतर्कता और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से छह वर्षीय टोकेश्वर निर्मलकर को नई जिंदगी मिली है। उसलापुर निवासी रामायण निर्मलकर के पुत्र टोकेश्वर की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत चिरायु टीम द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान की गई। जांच में पता चला कि बच्चा गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति बेहद जटिल थी और किसी भी समय जान का खतरा हो सकता था।

बच्चे को पहले जिला अस्पताल बिलासपुर और बाद में रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) भेजा गया। वहां विशेषज्ञों ने जांच के बाद बताया कि उसका इलाज राज्य के बाहर किसी सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक सेंटर में ही संभव है। इसके बाद उसे हैदराबाद के केयर हॉस्पिटल रेफर किया गया। हैदराबाद में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की जान बचाने के लिए जटिल ओपन हार्ट सर्जरी आवश्यक है। इलाज का अनुमानित खर्च करीब 7 लाख रुपये था, जिसे गरीब परिवार वहन करने की स्थिति में नहीं था। ऐसे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गढ़ेवाल के मार्गदर्शन में आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की गईं। राज्य नोडल एजेंसी ने उपचार के लिए 7 लाख रुपये की मंजूरी दी और राशि सीधे अस्पताल को उपलब्ध कराई गई।

इसके बाद 8 मई 2026 को हैदराबाद में बच्चे की सफल ओपन हार्ट सर्जरी की गई। कई घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद टोकेश्वर की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और 29 मई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में वह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है। चिरायु टीम उपचार के बाद भी बच्चे की नियमित निगरानी कर रही है। टीम समय-समय पर उसके घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण और फॉलोअप कर रही है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर चिरायु टीम और स्वास्थ्य विभाग की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। वहीं बच्चे के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि समय पर पहचान और सरकारी सहायता नहीं मिलती तो उनके बेटे को बचा पाना संभव नहीं था।

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