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उत्तर प्रदेश में संगठन से सरकार तक बदलाव के संकेत, चुनाव से पहले BJP में बड़ा फेरबदल संभव

By Admin|02 Jun 2026, 9:01 AM
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लखनऊ

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव अभी भले दूर दिखाई देता हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उसकी तैयारी लगभग युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं और हालिया संगठनात्मक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि यूपी बीजेपी में बड़ा फेरबदल होने वाला है। चर्चा यह भी है कि संगठन की लगभग आधी टीम बदली जा सकती है और ऐसे नेताओं को हटाया जा सकता है जो लंबे समय से एक साथ कई पदों पर बने हुए हैं। यह बदलाव केवल चेहरे बदलने का मामला नहीं है, बल्कि 2024 लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है। 

आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ था। 80 सीटों वाले राज्य में बीजेपी और उसके सहयोगियों का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने महसूस किया कि केवल सरकार के कामकाज के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता, संगठन को भी उतना ही मजबूत करना होगा। हालांकि बाद के उपचुनावों में बीजेपी ने वापसी की, लेकिन पार्टी नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि 2027 की लड़ाई कहीं ज्यादा कठिन होगी। इसी वजह से बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की समीक्षा की जा रही है।

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दोहरे पदों पर बैठे नेताओं पर क्यों है नजर?
बीजेपी की संगठनात्मक संस्कृति हमेशा "एक व्यक्ति, एक जिम्मेदारी" की बात करती रही है। लेकिन समय के साथ कई नेता ऐसे हो गए हैं जो संगठन और सत्ता दोनों में प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी अब ऐसे नेताओं की सूची तैयार कर रही है जो एक से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। पार्टी का मानना है कि चुनावी तैयारी के दौर में संगठन को पूरा समय देने वाले नेताओं की जरूरत होगी। ऐसे में कुछ नेताओं को संगठन से और कुछ को सरकार से हटाकर नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

क्या आधी टीम बदल सकती है?
हालिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि प्रदेश संगठन में 50 प्रतिशत तक बदलाव संभव है। क्षेत्रीय अध्यक्षों, मोर्चा अध्यक्षों और कई प्रमुख पदाधिकारियों को बदला जा सकता है। जिला स्तर पर इसकी शुरुआत भी दिखाई देने लगी है, जहां लगातार नए जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी 2027 से पहले संगठन में "एंटी-इन्कम्बेंसी" नहीं आने देना चाहती। लंबे समय से एक ही पद पर बैठे नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर आदि क्षेत्रों के अध्यक्षों में बदलाव संभावित है। नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को अपनी टीम खुद चुनने की छूट मिलेगी, ताकि स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा आए। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक मोर्चे सहित सातों मोर्चों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद करीब 70-95 जिलों में जिलाध्यक्ष बदले जा चुके हैं। गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी री-शफल हुआ है। यह राज्य स्तर के बदलाव की तैयारी माना जा रहा है।

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61 'कठिन' सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस
बीजेपी ने 2027 के चुनावों के लिए एक खास रणनीति बनाई है। पार्टी सबसे पहले उन 61 विधानसभा सीटों पर काम कर रही है, जहां उसे 2012, 2017 और 2022 के लगातार तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। इन 61 सीटों का भौगोलिक बंटवारा कुछ इस तरह है:

इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।

क्षेत्र                         कुल कठिन सीटें          प्रमुख जिले
पूर्वी उत्तर प्रदेश             22                   आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश         13                    सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर
अन्य क्षेत्र                       26                   पूरे प्रदेश में फैली अन्य सीटें

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी नेताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव प्रचार के शुरुआती चरण में इन्हीं 61 मुश्किल सीटों को प्राथमिकता दें। इनमें से पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से 27 सीटें 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) ने जीती थीं। हालांकि, स्वार, रामपुर और कुंदरकी जैसे मुश्किल माने जाने वाले इलाकों में हुए उपचुनावों में जीत मिलने के बाद से बीजेपी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।

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जातीय समीकरण भी बड़ी वजह
बीजेपी का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट केवल संगठनात्मक नहीं, सामाजिक भी है। 2024 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने "PDA" (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए कई वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसके बाद बीजेपी ने भी सामाजिक समीकरणों पर नए सिरे से काम शुरू किया है। हालिया कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक चर्चाओं में ओबीसी, दलित और गैर-यादव पिछड़े वर्गों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर जोर देखा गया है।

योगी सरकार और संगठन में तालमेल पर फोकस
बीजेपी नेतृत्व की एक बड़ी चिंता संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बाद कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाएं तेज हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा ताकि चुनावी तैयारियों में कोई भ्रम न रहे।

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