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जयपुर को स्वच्छ हेरिटेज शहर बनाने पर जोर, गंदगी पर सीधे जिम्मेदारी तय करेगा हाईकोर्ट

By Admin|27 May 2026, 1:21 PM
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जयपुर

राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने साफ कहा कि सफाई कर्मचारियों से दफ्तर के अन्य काम कराने के बजाय सिर्फ सफाई का मूल काम ही लिया जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी मिली, तो सीधे संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय होगी. इसके साथ ही, जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेरिटेज शहर बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुले में कचरा फेंकने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने और पर्याप्त डस्टबिन रखने के निर्देश दिए हैं.

उचित स्थानों पर डस्टबिन लगाने के निर्देश
अदालत ने सफाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं और उनकी नियमित सफाई की जाए. कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित जमादार और
स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी.

खंडपीठ ने याद दिलाया कि जयपुर एक ऐतिहासिक हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाना चाहिए कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सके. चूंकि पर्यटन उद्योग राजस्थान का सबसे बड़ा उद्योग है, इसलिए अदालत ने इस तरह के स्वच्छता प्रयासों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की आवश्यकता जताई है.

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अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को मिली दिशा-निर्देश की जिम्मेदारी
इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को सौंपी गई है. साथ ही, अदालत ने आम शहरवासियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) से भी अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने और नगर निगम की मदद करने की अपील की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि सालों पहले हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए 16 बिंदुओं के निर्देशों की नगर निगम ने आज तक पालना नहीं की है, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह नया आदेश पारित किया.

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