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यूपी में राहत का ऐलान: दोगुना मुआवजा, देखें कौन-कौन बनेगा इसका मुख्य लाभार्थी

By Admin|06 May 2026, 9:05 AM
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लखनऊ 

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यूपी में किसानों के हित से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है. लंबे समय से बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों की जो शिकायतें थीं, अब उन पर सरकार ने ठोस कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुआवजा व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए किसानों को सीधा आर्थिक लाभ देने का फैसला किया गया है। 

अब 765, 400, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित जमीन पर पहले से कहीं ज्यादा मुआवजा मिलेगा. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां टावर (खंभे) खड़े किए जाते हैं, उस जमीन के लिए किसानों को अब जमीन की कीमत का 200% यानी दोगुना मुआवजा मिलेगा. वहीं, जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं, उस हिस्से (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर) के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा। 

क्यों जरूरी था यह बदलाव
दरअसल, बिजली की बड़ी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जमीन की जरूरत पड़ती है. टावर लगाने के साथ-साथ उनके बीच से गुजरने वाली तारों के नीचे भी जमीन का उपयोग सीमित हो जाता है. किसान उस जमीन पर न तो निर्माण कर सकते हैं और न ही कई बार पूरी तरह खेती कर पाते हैं. पहले इस नुकसान के बदले किसानों को या तो बहुत कम मुआवजा मिलता था या कई मामलों में बिल्कुल नहीं मिलता था. यही वजह थी कि कई परियोजनाओं में स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता था. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है, ताकि किसानों के साथ न्याय हो और परियोजनाएं भी बिना रुकावट आगे बढ़ सकें। 

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पहले क्या था नियम, अब क्या बदला
अगर पुराने सिस्टम की बात करें, तो 2018 से पहले टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अक्सर कोई स्पष्ट मुआवजा तय नहीं था. कई मामलों में किसानों को उचित भुगतान नहीं मिल पाता था. 2018 में इसमें सुधार किया गया और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया. लेकिन इसके बावजूद एक बड़ी कमी बनी रही लाइन के नीचे आने वाली जमीन (कॉरिडोर) के लिए कोई मुआवजा नहीं था. अब नई व्यवस्था में दोनों हिस्सों को शामिल किया गया है. टावर के नीचे जमीन का 200% (दोगुना) मुआवजा दिया जाएगा इसी तरह लाइन कॉरिडोर (तारों के नीचे) 30% मुआवजा दिया जाएगा. यानी अब किसान को उसकी जमीन के हर प्रभावित हिस्से का भुगतान मिलेगा। 

कैसे तय होगा मुआवजा 
मुआवजा तय करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित सर्किल रेट को आधार बनाया जाएगा. इसका मतलब है कि हर जिले में जमीन की जो सरकारी दर तय होती है, उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा. इससे मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान बनेगी. साथ ही विवाद की संभावना भी कम होगी. सरकार के मुताबिक, इस नए फैसले से किसानों को पहले के मुकाबले 21% से 33% तक ज्यादा लाभ मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार के इस फैसले को अगर सरल भाषा में समझा जाए तो जहां पहले कम या कोई मुआवजा नहीं मिलता था, अब वहां सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. जमीन का उपयोग भले सीमित हो, लेकिन उसका मुआवजा मिलेगा. लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति खत्म होगी.  यह फैसला खास तौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी जमीन से होकर बड़ी बिजली लाइनें गुजरती हैं। 

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 क्या होगा इसका असर
सरकार का मानना है कि इस फैसले का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिजली परियोजनाओं को भी गति मिलेगी. पहले जमीन से जुड़े विवादों और विरोध के कारण कई प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी. अब जब किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा, तो उनकी सहमति भी आसानी से मिलेगी. इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम तेजी से पूरा हो सकेगा, जिसका सीधा फायदा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मिलेगा. ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह नई व्यवस्था भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है. देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की मुआवजा नीति लागू की जा रही है. उनका कहना है कि यह फैसला एक तरह से दो अहम जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है एक तरफ किसानों के अधिकार और दूसरी तरफ विकास की जरूरत. अक्सर देखा जाता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने पर विवाद होता है. लेकिन अगर मुआवजा सही और समय पर मिले, तो यह टकराव काफी हद तक कम हो सकता है. उनका कहना है कि सरकार ने इस फैसले के जरिए यही संदेश देने की कोशिश की है कि विकास के साथ-साथ किसान हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। 

जमीनी असर कब दिखेगा
नई मुआवजा व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर धीरे-धीरे जिलों में दिखाई देगा. जहां भी नई ट्रांसमिशन लाइनें बनेंगी या पुराने मामलों का निपटारा होगा, वहां किसानों को इसका फायदा मिलेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस नीति को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है। 

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