उत्तर प्रदेशराज्‍य

यूपी में बदली तस्वीर: योगी राज में महिला सुरक्षा बनी हकीकत

By Admin|01 May 2026, 9:31 PM
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लखनऊ. 
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा। इससे पहले महिला अपराध के चलते यूपी का नाम देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाया रहता था। वहीं बीते 9 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए बड़े कम उठाए हैं। इससे प्रदेशभर की बहन-बेटियों में सुरक्षा का भाव देखने को मिल रहा है।
योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में महिला अपराधों पर अंकुश लगना शुरू हुआ। इसके साथ ही अपराधियों में भय देखने को मिल रहा है। योगी सरकार में महिला अपराध से जुड़े मामलों की सुनवाई भी तेजी से की जा रही है, ताकि कोई अपराधी बच न पाए। इस सरकार में महिला सुरक्षा केवल दावा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखने वाला बदलाव भी है। इसके उदाहरण के तौर पर बीट पुलिसिंग, मिशन शक्ति, पिंक बूथ, एंटी रोमियो स्क्वाड, फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे कई अहम प्रयास को देखा जा सकता है।

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9 साल में 218 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए
सपा सरकार के 5 वर्षों के शासन में एक भी फास्ट ट्रैक पॉक्सो कोर्ट नहीं बना, जबकि पॉक्सो एक्ट 2012 में ही लागू हो गया था। योगी सरकार में फास्ट ट्रैक कोर्ट और पॉक्सो विशेष न्यायालयों ने महिलाओं और बच्चियों को तेजी से न्याय दिलाया। योगी सरकार के 9 वर्षों में 218 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएसटी) बनाए गए, जिनके जरिए बलात्कार और पॉक्सो मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
वहीं 75 जिलों में स्थापित पॉक्सो विशेष न्यायालय के जरिए 6 महीने में निर्णय का लक्ष्य रखा गया है। योगी सरकार में 2017 से ऑपरेशन शक्ति के जरिए छेड़छाड़ रोकने के लिए विशेष पुलिस अभियान जारी है। वहीं वर्ष 2020 से मिशन शक्ति के तहत महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से जुड़ा एकीकृत अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 40 हजार पुलिसकर्मियों को अपराध रोकने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया।

5 करोड़ शिकायतों का निवारण किया
महिला हेल्पलाइन 1090 के जरिए 5 करोड़ से ज्यादा बहन-बेटियों की शिकायतों का निवारण किया गया है। साथ ही यही से एफआईआर दर्ज कराने की भी सुविधा दी गई। योगी सरकार में पहली बार महिला पुलिस थानों की स्थापना की गई। हर जिले में कम से कम एक महिला पुलिस थाना संचालित है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में जिम्मेदारी संभालते ही छेड़खानी रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया। आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 तक इन टीमों ने करोड़ों लोगों की चेकिंग की और हजारों की संख्या में मनचलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसी सरकार में पिंक बूथ और आउटपोस्ट की शुरूआत की गई। इसके तहत 2500 से ज्यादा पिंक बूथ बनाए गए। साथ ही पिंक पेट्रोलिंग (दोपहिया और चौपहिया वाहनों से) की शुरुआत की गई। दूसरी तरफ सेफ सिटी प्रोजेक्ट के जरिए लखनऊ समेत कई जिलों को हजारों सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से जोड़ा गया, ताकि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन निगरानी भी सुनिश्चित की जा सके।

अभियोजन में आया सुधार
योगी सरकार की मंशा है कि महिलाओं से जुड़े अपराध की सिर्फ रिपोर्ट ही न हो बल्कि उन पर कार्रवाई और सजा भी सुनिश्चित हो। जहां वर्ष 2012 में चार्जशीट दर 58.3 प्रतिशत थी, वो 2022 में बढ़कर 76.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें लगातार सुधार किया जा रहा है। दोषसिद्धि दर 17.2 प्रतिशत से बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गई। 
सपा शासन में न्यायालयों में महिलाओं के प्रति अपराधों के औसतन 78 प्रतिशत मामले लंबित रहते थे। योगी सरकार फास्ट ट्रैक और पॉक्सो कोर्ट के माध्यम से इसे 65 प्रतिशत तक ला चुकी है।
योगी सरकार में महिलाओं के लिए कई अहम कदम उठाए गए। इससे पीड़िता खुद को दोषी नहीं समझती, बल्कि बिना डरे अपराध के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार का साथ और भरोसा मिल रहा है।

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