छत्तीसगढ़

विधायक ने ‘अस्मिता परियोजना’ का शुभारंभ किया, ग्राम मथनीबेड़ा में महिलाओं को मिलेगा सशक्त स्वरोजगार

By Admin|19 Apr 2026, 6:01 PM
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रायपुर : विधायक ने ग्राम मथनीबेड़ा में 'अस्मिता परियोजना' का शुभारंभ, महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार का सशक्त अवसर

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रायपुर

आदिवासी बहुल कोंडागांव जिले के ग्राम मथनीबेड़ा में  शाम बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुलता उसेंडी द्वारा नीति आयोग मद से महत्वाकांक्षी पहल “अस्मिता परियोजना” का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

विधायक ने कहा कि गांव के हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए यह कार्ययोजना बनाई गई है। “अस्मिता परियोजना” का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं सफल उद्यमी के रूप में स्थापित करना है। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को व्यक्तिगत पोल्ट्री शेड प्रदान कर स्थायी एवं दीर्घकालिक स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। परियोजना के तहत महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि जल्द ही गांव को पक्की सड़क की सुविधाएं मिलेगी और सरकार के मंशानुरूप गांव में सभी आवश्यक मुलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। 

कलेक्टर ने कहा कि अस्मिता प्रोजेक्ट के तहत पायलेट प्रोजेक्ट मथनीबेड़ा गांव को चयनित किया गया है और पहले चरण में 07 महिला हितग्राहियों का चयन किया गया है और जल्द ही गांव के अन्य हितग्राहियों को भी आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

कार्यक्रम को जिला पंचायत सदस्य नंदलाल राठौर सहित अन्य जनप्रतिनधियों ने भी संबोधित करते हुए इस पहल को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रामदई नाग, दीपेश अरोरा, प्रेम सिंह नाग सहित जनपद पंचाय सीईओ उत्तम महोबिया एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। 

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अस्मिता परियोजना
यह परियोजना एक त्रिपक्षीय मॉडल पर आधारित है, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा मार्गदर्शन एवं निगरानी, महिला लाभार्थियों द्वारा संचालन एवं प्रबंधन तथा एबिस फूड एंड प्रोटीन्स द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट, तकनीकी सहयोग एवं बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। अस्मिता परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन एवं निरंतर फील्ड सपोर्ट प्रदान किया जाएगा, जिससे उत्पादन में वृद्धि एवं जोखिम में कमी सुनिश्चित हो सके। इस मॉडल से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। परियोजना के तहत प्रति महिला लाभार्थी को वार्षिक लगभग 1.5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय का लक्ष्य रखा गया है, वहीं मासिक औसत आय 12 से 13 हजार रुपये तक होने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पोषण सुधार एवं प्रोटीन उपलब्धता बढ़ाने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा भविष्य में सुकर पालन और मछली पालन को भी शामिल किया जाएगा।

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