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लखपति दीदी पहल से नारी शक्ति वंदन के तहत मध्यप्रदेश में महिलाओं को मिली आर्थिक स्वतंत्रता

By Admin|17 Apr 2026, 9:12 AM
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नारी शक्ति वंदन: लखपति दीदी पहल से मध्यप्रदेश में महिलाओं को मिली आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा

भोपाल 

मध्यप्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “लखपति दीदी” पहल उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का लक्ष्य स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। राज्य सरकार ने आगामी दो वर्षों में 16.41 लाख परिवारों को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में पहुंच चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 526 मास्टर ट्रेनर और 20 हजार 517 लखपति सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षित कर्मी महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों में प्रशिक्षण देने के साथ उनकी आय-व्यय योजना तैयार करने और वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। योजना के तहत महिलाओं को कम से कम दो या अधिक आय स्रोतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे जोखिम कम हो और आय में स्थिरता बनी रहे।

कृषि क्षेत्र में पहल

महिलाओं को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन, मसाला खेती (हल्दी, धनिया, मिर्च आदि) और फलदार वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई, पॉली मल्चिंग और पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और कीटनाशक निर्माण को भी बढ़ावा मिल रहा है। “ड्रोन दीदी” पहल के माध्यम से महिलाएं फसलों पर छिड़काव कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

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गैर-कृषि क्षेत्र में विस्तार

स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम, माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक उत्पाद जैसे हैंडलूम, टेराकोटा, जरी-जरदोजी और स्थानीय अनाज (कोदो, कुटकी, रागी) को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पशुपालन में सशक्तिकरण

पशुपालन क्षेत्र में “पशुसखी” तैयार की जा रही हैं, जिन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। क्लस्टर आधारित विकास और किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित किया जा रहा है।

समग्र विकास की दिशा में कदम

यह पहल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, वित्तीय प्रबंधन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है। विभिन्न विभागों के समन्वय से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। “लखपति दीदी” पहल मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

महिलाओं की आर्थिक उड़ान: 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 59 लाख परिवार सशक्त

प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूह (SHG) एक मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर करीब 59 लाख परिवार आज आजीविका से सशक्त हो रहे हैं। डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक “लखपति दीदी” योजना के तहत अब तक करीब 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ग्रामीण महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ाया है। छोटे-छोटे बचत समूह अब बड़े आर्थिक नेटवर्क में बदलते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

महिलाएं अब कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। समूह आधारित गतिविधियों ने उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है, जिससे वे ऋण लेकर अपने कार्यों का विस्तार कर पा रही हैं। सरकारी योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लाभ मिल रहा है। DAR में हो रही नियमित एंट्री से यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।

 

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