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CG : रायगढ़ में राशन घोटाले का खुलासा, सरकारी दुकान से चावल और नमक कम मिले, दो संचालकों पर FIR …

By kadwaghut|17 Oct 2026, 11:44 AM
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रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था में लाखों रुपये की कथित अनियमितता सामने आई है। ग्राम सोनबरसा की शासकीय उचित मूल्य दुकान में खाद्य विभाग की जांच के दौरान 10 लाख 84 हजार रुपये से अधिक मूल्य के खाद्यान्न की गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक दुकान के स्टॉक में 251.58 क्विंटल चावल और 3.20 क्विंटल नमक कम पाया गया। खाद्य निरीक्षक की शिकायत के आधार पर खरसिया थाना पुलिस ने राशन दुकान के दो संचालकों धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

राशन दुकान की जांच में सामने आई बड़ी अनियमितता जानकारी के अनुसार, खरसिया क्षेत्र के ग्राम सोनबरसा में संचालित सरकारी राशन दुकान के खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था की जांच की गई थी। खाद्य विभाग की टीम ने दुकान में उपलब्ध राशन का रिकॉर्ड से मिलान किया। इस दौरान स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक खाद्यान्न की मात्रा में अंतर सामने आया। जांच के अनुसार, दुकान में बड़ी मात्रा में चावल और नमक कम पाया गया। खाद्य विभाग ने इस कमी को गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित रिपोर्ट तैयार की। विभागीय रिपोर्ट में गायब पाए गए खाद्यान्न का मूल्य 10.84 लाख रुपये से अधिक बताया गया है।

251.58 क्विंटल चावल और 3.20 क्विंटल नमक कम मिला खाद्य निरीक्षक की जांच में राशन दुकान के स्टॉक में चावल और नमक की कमी दर्ज की गई। आंकड़े उपलब्ध विभागीय जांच विवरण पर आधारित हैं। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न की कमी सामने आने के बाद दुकान के संचालन और स्टॉक प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। हालांकि खाद्यान्न की कमी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ FIR खाद्य निरीक्षक ने जांच रिपोर्ट के आधार पर खरसिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सरकारी राशन दुकान के संचालक धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड और खाद्यान्न वितरण से जुड़ी जानकारी की जांच कर रही है।

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सरकारी राशन के वितरण और स्टॉक रिकॉर्ड की होगी जांच सरकारी उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से पात्र राशन कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इन दुकानों में प्राप्त खाद्यान्न, वितरण और शेष स्टॉक का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। सोनबरसा की राशन दुकान में जांच के दौरान खाद्यान्न की कमी सामने आने से यह सवाल उठा है कि रिकॉर्ड में दर्ज राशन और वास्तविक भंडारण में इतना बड़ा अंतर कैसे आया। पुलिस की जांच में खाद्यान्न की प्राप्ति, वितरण संबंधी अभिलेख और स्टॉक में दर्ज अंतर से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। गरीबों के राशन की व्यवस्था से जुड़ा मामला सरकारी राशन दुकानों का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशन दुकान के स्टॉक में बड़ी कमी सामने आना गंभीर प्रशासनिक मामला है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि खाद्यान्न की कमी के कारण कितने हितग्राही प्रभावित हुए या किसी राशन कार्डधारी को निर्धारित मात्रा से कम राशन मिला। इन पहलुओं पर भी संबंधित रिकॉर्ड और आगे की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। खाद्य निरीक्षक की रिपोर्ट पर पुलिस कार्रवाई खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट में दर्ज अनियमितता के आधार पर पुलिस ने दोनों नामजद संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रकरण में खाद्यान्न के स्टॉक, संभावित वित्तीय नुकसान और वितरण व्यवस्था से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगी। जांच के बाद सामने आएगी पूरी स्थिति सोनबरसा सरकारी राशन दुकान में 10.84 लाख रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी के मामले ने राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया है। खाद्य विभाग की रिपोर्ट में चावल और नमक की कमी दर्ज होने के बाद पुलिस ने दो संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था में लाखों रुपये की कथित अनियमितता सामने आई है। ग्राम सोनबरसा की शासकीय उचित मूल्य दुकान में खाद्य विभाग की जांच के दौरान 10 लाख 84 हजार रुपये से अधिक मूल्य के खाद्यान्न की गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक दुकान के स्टॉक में 251.58 क्विंटल चावल और 3.20 क्विंटल नमक कम पाया गया। खाद्य निरीक्षक की शिकायत के आधार पर खरसिया थाना पुलिस ने राशन दुकान के दो संचालकों धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। राशन दुकान की जांच में सामने आई बड़ी अनियमितता जानकारी के अनुसार, खरसिया क्षेत्र के ग्राम सोनबरसा में संचालित सरकारी राशन दुकान के खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था की जांच की गई थी। खाद्य विभाग की टीम ने दुकान में उपलब्ध राशन का रिकॉर्ड से मिलान किया। इस दौरान स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक खाद्यान्न की मात्रा में अंतर सामने आया। जांच के अनुसार, दुकान में बड़ी मात्रा में चावल और नमक कम पाया गया। खाद्य विभाग ने इस कमी को गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित रिपोर्ट तैयार की। विभागीय रिपोर्ट में गायब पाए गए खाद्यान्न का मूल्य 10.84 लाख रुपये से अधिक बताया गया है। 251.58 क्विंटल चावल और 3.20 क्विंटल नमक कम मिला खाद्य निरीक्षक की जांच में राशन दुकान के स्टॉक में चावल और नमक की कमी दर्ज की गई। आंकड़े उपलब्ध विभागीय जांच विवरण पर आधारित हैं। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्यान्न की कमी सामने आने के बाद दुकान के संचालन और स्टॉक प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। हालांकि खाद्यान्न की कमी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा। धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ FIR खाद्य निरीक्षक ने जांच रिपोर्ट के आधार पर खरसिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सरकारी राशन दुकान के संचालक धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस ने आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड और खाद्यान्न वितरण से जुड़ी जानकारी की जांच कर रही है। सरकारी राशन के वितरण और स्टॉक रिकॉर्ड की होगी जांच सरकारी उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से पात्र राशन कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इन दुकानों में प्राप्त खाद्यान्न, वितरण और शेष स्टॉक का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। सोनबरसा की राशन दुकान में जांच के दौरान खाद्यान्न की कमी सामने आने से यह सवाल उठा है कि रिकॉर्ड में दर्ज राशन और वास्तविक भंडारण में इतना बड़ा अंतर कैसे आया। पुलिस की जांच में खाद्यान्न की प्राप्ति, वितरण संबंधी अभिलेख और स्टॉक में दर्ज अंतर से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। गरीबों के राशन की व्यवस्था से जुड़ा मामला सरकारी राशन दुकानों का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में राशन दुकान के स्टॉक में बड़ी कमी सामने आना गंभीर प्रशासनिक मामला है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि खाद्यान्न की कमी के कारण कितने हितग्राही प्रभावित हुए या किसी राशन कार्डधारी को निर्धारित मात्रा से कम राशन मिला। इन पहलुओं पर भी संबंधित रिकॉर्ड और आगे की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। खाद्य निरीक्षक की रिपोर्ट पर पुलिस कार्रवाई खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट में दर्ज अनियमितता के आधार पर पुलिस ने दोनों नामजद संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रकरण में खाद्यान्न के स्टॉक, संभावित वित्तीय नुकसान और वितरण व्यवस्था से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगी। जांच के बाद सामने आएगी पूरी स्थिति सोनबरसा सरकारी राशन दुकान में 10.84 लाख रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी के मामले ने राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया है। खाद्य विभाग की रिपोर्ट में चावल और नमक की कमी दर्ज होने के बाद पुलिस ने दो संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

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