मध्य प्रदेश

बदलती तकनीक के साथ आ रही चुनौतियों का सामना करने के लिए भी होमगार्डस सक्षम बनें

By Admin|18 Mar 2026, 10:31 PM
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भोपाल 

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा या मानव निर्मित दुर्घटना के समय नुकसान को कम से कम करना और जनजीवन को पुनः पटरी पर लाना महत्वपूर्ण होता है। संकट के समय में धैर्य और साहस बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसी घड़ी में होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा से जुड़े स्वयंसेवकों की तत्परता और सेवा भावना समाज के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है। हमारे लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश में 82 हजार से अधिक स्वयंसेवकों की एक विशाल और अनुशासित शक्ति विद्यमान है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में सिविल डिफेंस की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारे देश में कोविड जैसे कठिन काल और आतंकी हमलों के विरूध हुई ठोस कार्रवाइयों से सिविल डिफेंस सिस्टम अधिक समर्थ बना है। हमारे सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स प्राकृतिक आपदाओं जैसे- बाढ़, भूस्खलन, अग्निकांड और राहत-बचाव के कार्यों में निरंतर प्रशिक्षित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में नागरिक सुरक्षा का इतिहास लंबा है। वर्ष 1968 में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर से आरंभ हुई यह यात्रा आज वट वृक्ष बन चुकी है। आज प्रदेश में मध्यप्रदेश नागरिक सुरक्षा के 82 हजार से अधिक वॉलेंटियर्स हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी समागम- 2026 को होमगार्ड परेड ग्राउंड पर संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत आपदा में बचाव के तरीकों के डेमोंसट्रेशन का अवलोकन किया। मध्यप्रदेश सिविल डिफेंस के वॉलेंटियर्स ने बाढ़ के दौरान रबर बोट तैयार करने, उपलब्ध संसाधनों से फ्लोटिंग रॉफ्ट तैयार करने, रोप ब्रिज निर्माण, मुश्किल वक्त में सीपीआर देने की प्रक्रिया और हवाई हमलों के दौरान बचाव के तरीकों और रोप रेस्क्यू का प्रदर्शन किया। इंदौर सिविल डिफेंस की बेटियों ने सेल्फ डिफेंस का प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वॉलेंटियर्स को नागरिक सुरक्षा जैकिट वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को डीजी होमगार्ड श्रीमती श्रीवास्तव ने इस अवसर पर स्मृति चिन्ह भेंट किया।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटियों को सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण देना आवश्यक है। इस दिशा में की जा रही पहल की उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के प्रमुख मार्गों के आसपास के थाना स्टॉफ को सड़क हादसे के घायलों की जान बचाने के लिए भी विशेष प्रशिक्षण देने की आवयकता बताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नागरिकों का जीवन सुरक्षित करने के लिए 'राहवीर योजना' और 'पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा' जैसी सुविधाओं की शुरुआत की है। मध्यप्रदेश यह पहल करने वाला देश का प्रथम राज्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वन्य जीवों के साथ निडरता का वातावरण बना है। हमारे अभयारण्यों में टाइगर और चीतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वन्य जीव प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के लिए भी प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक के बदलते दौर में नई कठिनाइयां भी सामने आ रही हैं। उन्होंने बीती रात इंदौर में हुए हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जर से आग लगने और बाद में डिजिटल डोर लॉक नहीं खुलने से कई नागरिकों की मृत्यु हो गई। होम गार्ड्स एवं सिविल डिफेंस, तेजी से बदलती तकनीक के साथ आ रही ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी स्वयं को सक्षम बनाएं।

होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस की महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी समागम-2026 में 5 जिलों के 780 वॉलेंटियर्स शामिल हुए हैं। इन वॉलेंटियर्स को एक माह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्वयंसेवक आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा के सजग प्रहरी हैं, जो आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, यातायात सुरक्षा और सिविल डिफेंस की विभिन्न सेवाओं पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसमें आपदा के समय जीवन रक्षा, सम्पत्ति क्षति का न्यूनीकरण, उत्पादन बनाए रखना, जनमानस का मनोबल ऊंचा रखना, प्राथमिक उपचार, भीड़ नियंत्रण, राहत वितरण, संचार सहायता और मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने का प्रशिक्षण विशेष रूप से दिया जाता है। देश के प्रत्येक नागरिक को सिविल डिफेंस वॉलेंटियर होना आवश्यक है। एसडीआरएफ, होम गार्ड एवं सिविल डिफेंस के डीआईजी श्री मनीष अग्रवाल ने कहा कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर भी सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स तैयार हैं। सीनियर डिविजनल ऑफिसर श्री कमलेंद्र परिहार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में डिफेंस वालेंटियर्स, डिवीजन वार्डन आदि उपस्थित थे। सभी जिलों के सूचना केंद्रों में उपस्थित स्वयंसेवकों ने डिजिटल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

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