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छोटे दुकानदारों और स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत, आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से मांगी रिपोर्ट

By Admin|03 Jul 2026, 6:31 PM
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लखनऊ 
नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से स्मार्ट मीटरों की चेक मीटर से जांच व गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट तलब कर ली है। स्मार्ट मीटरों के तेज चलने की लगातार शिकायतें आती रही हैं। प्रीपेड मीटर के दौरान यह शिकायतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। उन्हीं मीटरों को अब पोस्ट पेड कर दिया गया है। ऐसे में शिकायतें भी बरकरार हैं। इसके अलावा वर्टिकल सिस्टम और घरों में छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं के संबंध में भी रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन से मांगी गई है। ऐसे में उम्मीद है कि बिजली ग्राहकों को राहत देने वाला कोई फैसला हो सकता है।

प्रदेश में करीब 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इनमें से तकरीबन पांच प्रतिशत पुराने मीटरों को चेक मीटर के तौर पर छोड़ने के आदेश थे। बिजली दरों पर सुनवाई के दौरान स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व कई सामान्य उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए थे। आयोग ने स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नियमानुसार इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी बिजली कंपनियों से 5 प्रतिशत चेक मीटरों की जांच व गुणवत्ता परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्मार्ट मीटरों के एक्यूरेसी टेस्ट के संबंध में हर जिले के आधार पर अलग-अलग गुणवत्ता व परीक्षण रिपोर्ट भी आयोग को उपलब्ध करवाई जाए ताकि मीटरों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इन आदेशों से उपभोक्ता हितों का संरक्षण होगा।
घरों में छोटी दुकान करवाने वालों के लिए तीन महीने में मांगी रिपोर्ट

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बिजली दरों की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली ही इस्तेमाल करने की सहूलियत का मामला उठाया था। इससे राज्य के 35-40 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। अब तक इन्हें दुकान के लिए घरेलू बिजली इस्तेमाल करने की छूट नहीं है। लिहाजा कई बार ऐसे उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी आदि धाराओं में कार्रवाई कर दी जाती है।

टैरिफ आदेश में नियामक आयोग ने इस मामले में पावर कॉरपारेशन से तीन महीने में विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने पहले भी पावर कॉरपोरेशन को इस संबंध में प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे, लेकिन कॉरपोरेशन ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। कॉरपोरेशन के प्रस्ताव के बाद ऐसे उपभोक्ताओं की दिक्कतों का स्थाई समाधान होने की उम्मीद है।

वर्टिकल व्यवस्था मूल्यांकन करवाएं, फीडर पर रहें पर्याप्त कर्मचारी
उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की वर्टिकल व्यवस्था के विफल होने और संविदा कर्मचारियों की छंटनी का भी मुद्दा उठाया था। आयोग ने टैरिफ आदेश में गुरुवार को पावर कॉरपोरेशन को आदेश दिए हैं कि पूरी वर्टिकल व्यवस्था का स्वतंत्र व पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन करवाने के आदेश दिए हैं। साथ ही उपकेंद्रों व फीडर स्तर तक रखरखाव के लिए पर्याप्त नियमित व संविदा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में निर्धारित मानव संसाधन मानकों का पूरा पालन किया जाए और प्रत्येक फीडर स्तर पर आवश्यक संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं ताकि विद्युत व्यवस्था अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सके।

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1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में लापरवाही पर नाराजगी
नियामक आयोग ने 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई है। आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के पारदर्शी व प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था पर तीन माह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन पावर कॉरपारेशन ने कोई रिपोर्ट नहीं दी। 1912 पर शिकायतों के फर्जी या कागजी निपटारे की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

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