छत्तीसगढ़

नैनो उर्वरकों का बढ़ता असर, अच्छी फसल के साथ मिट्टी की सेहत भी मजबूत

By Admin|02 Jun 2026, 8:11 PM
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रायपुर.

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नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (तरल उर्वरक) कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार हैं। ये पारम्परिक उर्वरकों (दानेदार यूरिया और डीएपी) की तुलना में बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं और पौधे के सीधे संपर्क में आकर तेजी से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। नैनो तकनीक के कारण इनका आकार अत्यंत छोटा (20-50 नैनोमीटर) होता है।

ये पौधों की कोशिकाओं के अंदर सीधे प्रवेश करके आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) प्रदान करते हैं, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे कृषकों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्रियां मिल रही हैं। किसान अब बिना किसी कठिनाई के अपनी आवश्यकतानुसार खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं।

’आधुनिक खेती से समृद्ध हो रहे कृषक छेदीलाल’
पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें बहुत सस्ती और किफायती होती हैं पारंपरिक उर्वरकों से होने वाले गैसीय उत्सर्जन और लीचिंग (पानी के साथ बहकर जमीन में जाने) की समस्या नैनो उर्वरकों से न के बराबर होती है, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम ढेलवाडीह के निवासी कृषक श्री छेदीलाल उरांव ने विकासखंड सोनपुरी स्थित सहकारी समिति से आगामी खरीफ फसल के लिए खाद और बीज प्राप्त किया है। लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले श्री उरांव का 6 से 7 सदस्यों का परिवार पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित है और वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। श्री उरांव ने बताया कि उन्होंने इस सीजन के लिए यूरिया एवं डीएपी उर्वरक ले लिया है। इसके साथ ही वे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपनी 1 एकड़ भूमि में हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की बुआई भी करेंगे।

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’नैनो उर्वरकों के चमत्कारी परिणाम’
कृषक उरांव ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के अपने बेहतरीन अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष इसके प्रयोग से उन्हें काफी लाभ हुआ था। नैनो डीएपी पौधों तक पोषक तत्वों की त्वरित और प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है और खेती की लागत को भी नियंत्रित करता है।
’मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार’
उरांव ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के समावेश से अब खेती अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने संकटमुक्त होकर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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