छत्तीसगढ़

जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान से वनांचल के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही सुशासन की रोशनी

By Admin|24 May 2026, 9:31 PM
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रायपुर

शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल कागजी सुविधा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव की एक नई सुबह लेकर आती हैं, जिनमें पात्र व्यक्तियों को आधार पंजीयन, बैंकिंग सेवाएं, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ने के लिये पात्रता परीक्षण, आवेदन एवं मौके पर निराकरण की कार्रवाई की जा रही है। शिविर के माध्यम से स्थानीय समस्याओं का अवलोकन, ग्रामीणों के साथ बैठक एवं योजनाओं का प्रचार-प्रसार, पात्र हितग्राहियों की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, जन सुनवाई तथा शिकायतों के निराकरण के लिये विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसका एक प्रत्यक्ष और जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की  रोन्ही पहाड़ी कोरवा हैं, जिनके जीवन में प्रशासन की एक संवेदनशील पहल से बेहद सकारात्मक परिवर्तन आया है।

सीमित संसाधन और अंधविश्वास के बीच बीत रही थी जिंदगी
          
विकासखंड राजपुर के सुदूर ग्राम पंचायत पतरापारा की निवासी  रोन्ही अपने परिवार के साथ बेहद सीमित संसाधनों में जीवनयापन करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की समुचित जानकारी और संसाधनों के अभाव में, कई बार मजबूरीवश उन्हें उपचार के लिए स्थानीय बैगा-गुनिया के सहारे रहना पड़ता था।बीमारी बढ़ने की स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना और शहर जाकर इलाज कराना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कष्टकारी साबित होता था। अस्पताल आने-जाने और महंगी दवाइयों में उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था, जिससे परिवार की रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी दूभर हो जाता था।

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चौपाल पर मिला आयुष्मान का वरदान
          
 रोन्ही के जीवन के इस ढर्रे को बदलने का माध्यम बना जिला प्रशासन द्वारा संचालित ?जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान। इसके तहत पतरापारा में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोन्ही की समस्या को समझा और मौके पर ही उनका श्आयुष्मान भारत कार्डश् बनाकर उन्हें सौंप दिया। आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अब रोन्ही और उनके पूरे परिवार को इलाज पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। अब वे किसी भी आपातकालीन स्थिति या बीमारी में अनुबंधित अस्पतालों में जाकर निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।

शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार
          
अपनी खुशी साझा करते हुए  रोन्ही बताती हैं, पहले हमारे लिए बीमारी का मतलब सिर्फ मानसिक चिंता और कर्ज का बोझ होता था। लेकिन अब यह आयुष्मान कार्ड हमारे पास है, जिससे हमें एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा का एहसास हुआ है। अब मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह निश्चिंत हूँ। उन्होंने जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर को दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवनदायिनी पहल बताते हुए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।

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