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छत्तीसगढ़: एंटी नक्सल ऑपरेशन रोकने की मांग! CM साय को माओवादी का पत्र

By Admin|24 Nov 2025, 1:56 PM
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जगदलपुर

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महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (एमएमसी जोन) के प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखकर सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को रोकने की अपील की है। इस पत्र में उन्होंने इस बार 'नक्सली सप्ताह' न मनाने की घोषणा भी की है और सरकार से पुनर्वास के लिए समय मांगा है।

प्रवक्ता अनंत ने पत्र में कहा है कि पार्टी की केंद्रीय कमेटी के सदस्य और पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड सोनू दादा ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए हथियार त्यागकर सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से विराम देने का जो निर्णय लिया है, उसका एमएनसी स्पेशल जोनल कमेटी समर्थन करती है। एमएमसी सतीश दादा के बाद हाल ही में एक और एमएमसी कॉमरेड चंद्रत्ना ने भी इस निर्णय का समर्थन किया है।

एमएमसी स्पेशल जोनल कमेटी भी हथियार छोड़कर सरकार की पुनर्वास और पुनर्निर्माण योजना को स्वीकार करना चाहती है। इसके लिए तीनों राज्यों की सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे उन्हें कुछ समय प्रदान करें।

पत्र में तीनों राज्यों की सरकारों से यह निवेदन किया गया है कि वे उन्हें 15 फरवरी 2026 तक का समय दें। प्रवक्ता ने यह भी स्वीकार किया कि यह समय सरकार द्वारा माओवाद समाप्ति के लिए तय की गई समय-सीमा (31 मार्च 2026) के दायरे में ही है।

इस अवधि के दौरान, तीनों राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे थोड़ा संयम बरतें और अपने सुरक्षा बलों के अभियानों को रोक दें। यहां तक कि आगामी पीएलजीए सप्ताह के दौरान भी कोई अभियान न चलाने की बात कही गई है। मुखबिरों की गतिविधियों को भी रोकने और सूचना के आधार पर बलों को किसी भी कार्रवाई में शामिल न करने का आग्रह किया गया है।

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'नक्सली सप्ताह' स्थगित
बदले में नक्सली प्रवक्ता ने विश्वास दिलाया है कि इस बार पीएलजीए सप्ताह नहीं मनाया जाएगा और उनकी तमाम गतिविधियां विराम पर रहेंगी। नक्सली प्रवक्ता द्वारा इस तरह का पत्र जारी करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। यह नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीतियों की सफलता का संकेत हो सकता है, या फिर यह रणनीतिक बदलाव का हिस्सा भी हो सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा के करीब आने का दबाव भी हो सकता है। प्रवक्ता द्वारा समय मांगने और हथियार छोड़ने की इच्छा व्यक्त करने से यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में शांति बहाली की दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा बलों और सरकारों को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, क्योंकि यह एक संवेदनशील स्थिति है और किसी भी अप्रत्याशित घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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