छत्तीसगढ़

CG : स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत सभी स्तर के कर्मचारियों को कान और श्रवण देखभाल के लिए दिया गया प्रशिक्षण…

By lokesh sharma|24 Nov 2025, 12:07 PM
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सारंगढ़-बिलाईगढ़ । श्रवण क्षमता मानव जीवन में सबसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में से एक है दुनिया भर में अक्षमता के साथ जिए गए वर्षों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है भारत वर्ष में लगभग 63 लाख लोग गंभीर श्रवण हानि से प्रभावित है, जिससे शारीरिक उत्पादक घटती है। इसमें से 50% से अधिक कारणों को रोक जा सकता है। बहुत कुछ दवाइयां ,सर्जरी आदि से भी ठीक की जा सकती है। कुछ मामले में हियरिंग एड एवं स्पीच थेरेपी की जरूरत पड़ती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया है।

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स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत सभी स्तर के कर्मचारियों को कान और श्रवण देखभाल की मूल जानकारी देना आवश्यक है। इसी कड़ी में सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में डॉक्टर्स, सीएचओ और आरएचओ डॉक्टर , नर्सेस, मितानिन एवं अभिभावक की कुल 250 प्रतिभागियों को 4 बैच में बांट कर 4 दिन तक प्रशिक्षित किया गया है जिससे सभी कर्मचारी सही तरीके से लागू कर सके। श्रवण शक्ति अच्छी होने से दूसरों से संवाद करने ,मानसिक विकास ,सामाजिक, शैक्षणिक और रोजगार में मदद मिलती है श्रवण हानि में हल्की हानि , माध्यम हानि एवं गंभीर हानि हो सकती है। भारत में हर एक लाख में 291 बहरेपन के प्रभावित व्यक्ति मिल सकता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर आर्थिक परिवारों में ज्यादा मिल सकती है।

श्रवण हानि के सामान्य कारण कान में मैल , पुराना कान बहाना ,कान में द्रव जमा हो जाना ,कान का परदा फट जाना , जन्मजात बधिरता , तेज आवाज के के कारण , ऑटो टॉक्सिंस दवाइयां, आदि।

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प्रशिक्षित करके श्रवण हानि को कम किया जा सकता है। कान की देखभाल की जागरूकता लाई जा सकती है। समय में पहचान करके उपचार दी जा सकती है और रोगियों को पुनर्वास दी जा सकती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक बुनियादी उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे है। मनुष्य के 5 महत्वपूर्ण इंद्रियों में स्पर्श , देखना ,सूंघना , सुनना और स्वाद की इंद्रियां होती है।

कान के लिए यह बिल्कुल न करे

गंदी उंगली कान में डालना ,गंदे पानी में तैरना , गंदे पानी में नहाना , कान में तेल डालना , घरेलू नुस्खे करना , केरोसिन डालना , कान में पिन डालना , कान में माचिस काड़ी डालना , कान में ईयरबड डालना ये बिल्कुल ही नहीं करना है।

कान का ऐसे करे देखभाल

खाना खाने से पहले हाथ धोना , शौचालय के बाद हाथ धोना , केवल स्वच्छ सूती कपड़े से कान को साफ करना , डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का ही उपयोग करना, यदि बच्चा जन्म से ही बधिर हो तो बच्चा आसपास की आवाजें नहीं सुन सकते, मां या परिवार की आवाजें नहीं सुन सकते इसलिए बोलना भी नहीं सीख पाते।

जन्म से बहरेपन के कारण

गर्भावस्था में संक्रमण, कठिन प्रसव, समय से पहले जन्म , जन्म के समय देरी से होने से ऑक्सीजन की कमी होना , माता पिता मे कोई बधिर हो , गर्भावस्था में सिफलिश होना , ऑटो टॉक्सिन दवाइयां , नवजात को तेज पीलिया होना , मेनिनजाइटिस होना , मॉम्स होना ,खसरा होना , इस कारण गर्भवती माता को समय पर जांच और टीकाकरण जरूर करावे।

सुझाव संस्थागत प्रसव करावे ,बच्चे का पूरा टीकाकरण करावे , बच्चे को मां की स्तनपान करावे , बच्चे का तुरंत श्रवण जांच करावे , श्रवण जांच बच्चे के जन्म के पहले दिन ही की जा सकती है। कान में दर्द, कान में मवाद , सुनने में कमी आदि कान के दर्द को कभी भी नजर अंदाज न करे।

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तेज आवाज से कान को नुकसान

आज के दौर में तेज आवाज कान के लिए नुकसानदायक है तेज आवाज से स्थायी श्रवण हानि हो सकती है ,मशीनों की आवाज , डीजे की आवाज , गाड़ियों की आवाज ,पटाखे की आवाज , बंदूक की आवाज , विस्फोटक , ड्रिल की आवाज , रेलवे ट्रेक की आवाज आदि सभी तेज आवाज श्रवण शक्ति को प्रभावित करता है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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