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हनीमून मर्डर केस में बड़ा अपडेट, सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट में अब मंगलवार को होगी सुनवाई

By Admin|09 Jul 2026, 9:03 PM
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इंदौर 

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इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले मे आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ दाखिल मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब मंगलवार को सुनवाई करेगा. तब तक यानी फिलहाल सोनम रघुवंशी की जमानत पर रिहाई बरकरार रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार 14 जुलाई को करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को सोनम की गिरफ्तारी के समय उसे दिए अरेस्ट मेमो और अन्य दस्तावेजों की कॉपी दायर करने को कहा है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि टाइपो एरर को कोर्ट ने जमानत का आधार बनाकर सोनम को जमानत पर रिहाई दे दी है। 

बता दें, भारतीय न्याय संहिता BNS की धारा 103 की जगह गलती से 403 टाइप हो गया था. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में खुद को बेगुनाह बताया है। 

पहले के दो फैसले देखने होंगे'
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को विस्तार से सुनेगी क्यों कि ये विचार करने का विषय है. अदालत ने कहा कि उसके पहले के दो फैसले हैं. देखना होगा कि दो फैसलों में मतभेद होने के कारण क्या इसे बड़ी बेंच को भेजा जाए. अदालत ने तुषार मेहता से कहा कि वह इसमें लिखित दलीलें दाखिल करें. इस पर तुषार मेहता ने कहा कि यहां ये मुद्दा नहीं है. यहां लिखित में आधार दिए गए थे. हमने सारे दस्तावेज दाखिल किए हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये देखना होगा कि जो आधार दिया गया वो टिकने वाला है या नहीं. अगर आधार गलत है तो जमानत आदेश चला जाएगा। 

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आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता
इससे पहले सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है. अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है,जिन्हें अदालत में संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है. केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता इसीलिए अदालत के पास उसकी जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है. वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है. वहीं मेघालय सरकार ने उसकी जमानत रद्द करने की मांग की है। 

सोनम रघुवंशी ने कही सहयोग करने की बात
सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है और ट्रायल में यदि कोई देरी हुई है तो उसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है. सोनम ने अदालत से कहा कि उसे 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और 28 अप्रैल 2026 को वह जेल से रिहा हो गई थी. ऐसे में उसे दोबारा जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि जमानत रद्द करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार इस मामले में मौजूद नहीं हैं। 

जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया
 हलफनामे में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने यह आरोप नहीं लगाया है कि उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है. साथ ही, मामले में अब उससे कोई बरामदगी बाकी नहीं है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.इसलिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी नहीं है. वह फिलहाल जमानत की शर्तों के अनुसार शिलांग में रह रही है। 

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'मुझे झूठा फंसाया गया'
सोनम ने अपने बचाव में यह भी कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है. बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोनम बेल पर बाहर आ चुकी है तो वो उसकी जमानत रद्द करने को इच्छुक नहीं है. हालांकि कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 

सोनम ने अदालत से कहा है कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता। 

हलफनामे में सोनम ने कहा है कि उससे कोई बरामदगी बाकी नहीं है. कोर्ट की ओर से लगाई शर्तों के मुताबिक वो शिलांग में ही रह रही है. इस केस में चार्जशीट पहले ही दायर हो चुकी है. ऐसे में इस बात की कोई संभावना नहीं है कि वो सबूत के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं। 

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