उत्तर प्रदेशराज्‍य

बड़ी कार्रवाई के दौरान 14 संचालकों पर 3 नई एफआईआर, अब तक 58 थोक लाइसेंस निरस्त/निलंबित

By Admin|11 Jul 2026, 11:41 PM
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लखनऊ/आगरा

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ चल रहे प्रदेशव्यापी अभियान में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी और सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के संगठित दवा सिंडिकेट की परतें खोल दी हैं। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, अवैध री-लेबलिंग, फिजीशियन सैंपलों की बिक्री और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के बाद 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 और निरस्त अथवा निलंबित थोक लाइसेंसों की संख्या 58 पहुंच गई है।

15 ड्रग इंस्पेक्टरों ने एक साथ मारे छापे

आयुक्त डॉ रोशन जैकब के नेतृत्व में गठित 15 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार (शू मार्केट), कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई की। जिन 13 फर्मों पर छापेमारी हुई उनमें मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला), मनी मेडिकल (मुबारक महल), नीलकंठ (कृष्णा कॉम्प्लेक्स), वंश फार्मा (कम्बूटोला), प्रशांत मेडिकल (कम्बूटोला), पोरवाल मेडकेयर (शू मार्केट), एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस (मुबारक महल), डॉली ड्रग हाउस (कम्बूटोला), मनु फार्मा (कोतवाली के सामने), आरडीएम फार्मास्युटिकल्स (नवबिया मार्केट), इनाया फार्मा (कम्बूटोला) और नूर फार्मा (कम्बूटोला) शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल के परिसरों को पूरी तरह सील कर दिया गया, जबकि नीलकंठ, कृष्णा कॉम्प्लेक्स स्थित प्रतिष्ठान और मनु फार्मा पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 22(1)(d) के तहत रोक लगा दी गई। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए।

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विभोर मेडिकल एजेंसी से खुला नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क

एफएसडीए की ताजा जांच टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की Chymoral Forte और Shelcal के नकली होने संबंधी शिकायत से शुरू हुई। 7 नवंबर 2025 को अंशिका फार्मा के मालिक मनोज गुप्ता की जांच में पता चला कि उन्होंने Chymoral Forte की खेप विभोर मेडिकल एजेंसी से खरीदकर पाल ब्रदर्स (कोलकाता) को बेची थी। विभोर मेडिकल एजेंसी के प्रो. संजीव कुमार गुप्ता के यहां जांच में खरीद के बिल फर्जी मिले। उन्होंने दवाएं गुप्ता मेडिकल एजेंसी (गोरखपुर) और हर्षित ट्रेडर्स (आगरा) से खरीदने का दावा किया, लेकिन दोनों फर्मों ने इससे इनकार कर दिया। वहीं वरदान मेडिकल एजेंसी में "ESI SUPPLY NOT FOR SALE" अंकित दवाएं मिलीं और लैब जांच में Chymoral Forte अधोमानक तथा ACILOC नकली पाई गई, जिसकी टोरेंट फार्मा ने भी पुष्टि की। पूछताछ में अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि उसने नकली दवाएं संजीव कुमार गुप्ता से बिना वैध बिल के खरीदी थीं। जांच में विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और पाल ब्रदर्स का अंतरराज्यीय सिंडिकेट सामने आने पर संजीव कुमार गुप्ता, अंकुर अग्रवाल, प्रियंका बंसल, अरुण कुमार गुप्ता और पाल ब्रदर्स के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 276, 277, 278, 316 और 318 में एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

अस्पताल की दवाओं की री-लेबलिंग से लेकर फर्जी बिलिंग तक, कई परतों में खुला सिंडिकेट

एफएसडीए की जांच में अस्पताल और सरकारी आपूर्ति की जीवनरक्षक दवाओं की री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं के संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ। 21 मई को युग फार्मा के प्रो. सचिन गुप्ता के यहां बिना कोल्ड-चेन रखे इंसुलिन इंजेक्शन और री-लेबलिंग मिली। पूछताछ में दवाओं की सप्लाई शारदा फार्मा के शिवम गुप्ता और आरएमडी फार्मा के राजेश गुप्ता तक पहुंची, जिसके बाद तीनों फर्में सील कर दी गईं। बाद में शारदा फार्मा के सीसीटीवी में नबील खान और सोनू बघेल संदिग्ध दवाएं हटाते दिखे। एसटीएफ गाजियाबाद की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे मोहित गुप्ता (महादेव फार्मा) से अस्पताल व सरकारी आपूर्ति की दवाएं बिना बिल खरीदकर उन पर लगी 'Not for Sale' पहचान हटाकर फर्जी लेबल और नई एमआरपी के साथ बाजार में बेचते थे। इस मामले में सचिन गुप्ता, शिवम गुप्ता, नितिन गुप्ता, राजेश गुप्ता, मोहित गुप्ता और हितेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं 1 से 3 जुलाई की जांच में वी.ए. मेडिकोज में Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी दवाओं की री-लेबलिंग, नकली Telma-H और फर्जी खरीद बिल मिले। शोभित अग्रवाल ने दवाएं लाइसेंस निरस्त हो चुके हर्षित ट्रेडर्स से लेने की बात स्वीकार की, जबकि जांच में वरदान मेडिकल एजेंसी के पुराने बिलों से करीब ₹1.88 करोड़ की फर्जी बिलिंग, अंकुर अग्रवाल द्वारा संजीव गुप्ता (विभोर मेडिकल एजेंसी) से बिना बिल नकली दवाएं खरीदने और सबूत मिटाने के प्रयास का खुलासा हुआ। साथ ही मोहित बंसल (रुद्रा एंटरप्राइजेज) और प्रवीण अग्रवाल (श्री भगवती मेडिकल एजेंसी, मथुरा) द्वारा फर्जी बिल, UP-80 EL-0069 वाहन व ऑटो-रिक्शा के जरिए नकली दवाओं को वैध दिखाने का खेल सामने आया। इसके आधार पर वी.ए. मेडिकोज, शोभित अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, संजीव गुप्ता, मोहित बंसल और प्रवीण अग्रवाल समेत संबंधित आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

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₹3.63 करोड़ की अवैध दवाएं जब्त, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की परतें खुलीं

एफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आगरा में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ मई 2026 से लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, अवैध तथा सरकारी और डिफेंस सप्लाई की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। यह अभियान केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिंडिकेट की आर्थिक और आपराधिक श्रृंखला को तोड़ने पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि पूरे अभियान के दौरान अनियमितताओं और अवैध कारोबार में संलिप्तता पाए जाने पर अब तक 58 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। इस सिंडिकेट के खिलाफ पहले ही 6 नामजद एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। अब 10 जुलाई की कार्रवाई के आधार पर तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए आगरा के कोतवाली फव्वारा थाने में तहरीर दी गई है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नकली दवाओं, अवैध री-लेबलिंग, फिजिशियन सैंपलों की कालाबाजारी और अंतरजनपदीय मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जाए। इसके अलावा विभाग को ड्रग एसोसिएशनों द्वारा कुछ दवा व्यापारियों से कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी मिली हैं। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में किसी व्यापारी के आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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