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UP Panchayat Election 2026,ओबीसी आयोग गठन पर आज कैबिनेट की बड़ी बैठक

By Admin|18 May 2026, 12:31 PM
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लखनऊ

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उत्तर प्रदेश में  गांव-गांव एक ही बात की चर्चा है कि पंचायत चुनाव कब होंगे? ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में हो रही देरी की सबसे बड़ी वजह यूपी में समर्पित ओबीसी आयोग का न होना है. हाईकोर्ट के सख्त तेवर अपनाए जाने के बाद यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपने कदम बढ़ा सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है?

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ, लेकिन अब तस्वीर साफ होती दिख रही है. पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग के गठन पर कैबिनेट में मोहर लग सकती है. इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा प्रस्ताव को मंजूरी देने का प्रस्ताव है.  

यूपी में मौजूदा ओबीसी आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, जिसे सरकार ने अक्टूबर 2026 तक के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन कानूनी रूप से उसके पास समर्पित आयोग के अधिकार नहीं हैं. ओबीसी आयोग अपने तीन साल के मूल कार्यकाल के रहते हुए ही आरक्षण का सर्वे कर सकता है. इसीलिए योगी सरकार सोमवार को कैबिनेट बैठक में ओबीसी आयोग गठन को अमलीजामा पहना सकती है.

ओबीसी आयोग गठन को मिलेगी मंजूरी?
वैश्विक संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मितव्ययता की अपील के बाद सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक होगी. इस लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूबे में पंचायत चुनाव पर छाए सियासी बादल कैबिनेट की बैठक में छंटती हुई दिख सकती हैय कैबिनेट बैठक में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे सकती है.

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ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का स्वरूप तय होगा. सूबे में समर्पित ओबीसी आयोग नहीं होने के चलते पंचायत चुनाव के आरक्षण की प्रक्रिया लटकी हुई है. हाईकोर्ट ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा था कि ओबीसी आयोग में क्यों देरी हो रही है, जिसके बाद ही समर्पित ओबीसी आयोग गठन को कैबिनेट में मंजबूरी देने ही.

यूपी में नए ओबीसी आयोग के बाद ही ओबीसी की आबादी का सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन का सर्वे करेगी. ओबीसी आयोग के सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण कितने प्रतिशत और किन सीटों पर लागू होगा.ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण पहले से ही निर्धारित है. इसके अलावा कौन सीट आरक्षित करनी है और कौन नहीं?

चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो को मंजूरी?
योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है.मेट्रो परियोजना में पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के लिए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी जा सकती है. इसके अलावा आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 (आगरा कैंट से कालिंदी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट विचार कर सकती है.

कैबिनेट बैठक में क्या-क्या होंगे फैसले
लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन में बदलाव करने के लिए संशोधन प्रस्ताव भी कैबिनेट के सामने विचार के लिए रखा जाएगा. ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के साथ चल रही समुदाय परियोजना को पांच साल के लिए और बढ़ाया जाएगा. परियोजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है. वस्त्रोद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास परियोजनाओं को मंजूरी कैबिनेट दे सकती है.

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आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कैबिनेट कैशलेस इलाज की सुविधा देने जा रही है. सोमवार को कैबिनेट बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा. इन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी. कैबिनेट में जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़ी नई नियमावली को भी मंजूरी मिल सकती है.

हाथरस, बागपत और कासगंज में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट सहमति देगी. वहीं, कैबिनेट के सामने ऊर्जा विभाग केनरा बैंक से निकाली गई 1500 करोड़ रुपये की राशि की कार्येत्तर इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा. कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की परियोजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है.

राज्य सरकार की प्रतिभूतियों के संबंध में वर्ष 2007 में जारी किए गए जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन का प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगी. इसके अलावा भारतीय स्टांप अधिनियम में भी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. वहीं, यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर लगने वाले अतिरिक्त कर को रेशनलाइज करने को भी कैबिनेट अपनी मुहर लगा सकती है.

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