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CG : आत्मा ही वास्तविक धन है, संसार में कोई गरीब नहीं : मुनि आगम सागर

By kadwaghut|24 Aug 2026, 4:49 PM
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बड़ा मंदिर में त्रिसंयोग धर्मलाभ, महामस्तकाभिषेक, बच्चों की विशेष ज्ञान कक्षा एवं मुनि आगम सागर की मंगल देशना

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रायपुर । दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के 23 अगस्त को प्रातः 7:30 बजे भव्य जिनालयों में सकल जैन समाज को एक साथ त्रिसंयोग धर्मलाभ का अलौकिक एवं पावन सुअवसर प्राप्त हुआ। यह समस्त धार्मिक आयोजन मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, एलक धैर्य सागर एवं एलक स्वागत सागर के मंगल सानिध्य और मार्गदर्शन में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

प्रातः काल की बेला में जिनालय में भगवान पार्श्वनाथ जी की प्रतिमा का स्वर्ण कलशों के माध्यम से प्रथम महामस्तकाभिषेक किया गया। इस परम पवित्र कार्य को संपन्न करने का सौभाग्य संजय दीप्ति जैन, अरुण जैन प्रदर्शनी नगर, प्रदीप जैन विश्वपरिवार, पवन कुमार, अमित कुमार, प्रणीत कुमार एवं श्रेय जैन जोरापारा वाले को प्राप्त हुआ।

इसके पश्चात मुनि आगम सागर के मुखारबिंद से मंत्रोच्चारण के बीच स्फटिक मणि की प्रतिमाओं पर शांतिधारा संपन्न हुई। शांतिधारा करने का पुण्य लाभ सुजीत कुमार जैन लाभांडी एवं सुनील जैन वारासिवनी वाले ने प्राप्त किया।

इसी पावन समय पर त्रिकाल चौबीसी में प्रतिमा विराजमान करने वाले गुरुकृपा परिवार समता कॉलोनी के नरेंद्र जैन,योगेंद्र,रितेश,रिंकू जैन ने मूलनायक भगवान आदिनाथ जी का महामस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य अर्जित किया।

मुनि पुनीत सागर के पावन सानिध्य में छोटे बच्चों के मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास हेतु प्रति शनिवार और रविवार को विशेष थर्ड आई (अंतर ज्ञान चक्षु) कक्षा का आयोजन किया जा रहा है। इस श्रृंखला के अंतर्गत बीते कल शनिवार को दोपहर 4:00 बजे भव्य कक्षा आयोजित की गई, जबकि रविवार को दोपहर 1 बजे पुनः इस कक्षा का आयोजन किया जाएगा। इन ज्ञानवर्धक कक्षाओं में लगभग 100 से अधिक बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी आंतरिक क्षमताओं को विकसित कर रहे हैं।

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धार्मिक कक्षाएं और स्वाध्याय
अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत श्रद्धालुओं द्वारा आचार्य की संगीतमय पूजन की गई। पूजन संपन्न होने के बाद प्रतिदिन की तरह धार्मिक कक्षाओं का आयोजन हुआ। धार्मिक कक्षाओं के अंतर्गत मुनि पुनीत सागर ने श्रद्धालुओं को तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ का गहराई से अध्ययन कराया। वहीं मुनि आगम सागर ने छह ढाला ग्रंथ का वाचन कर भक्तों को जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों से अवगत कराया।

मंगल देशना: आत्मा ही वास्तविक धन है, संसार में कोई गरीब नहीं

धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि आगम सागर ने अपनी अमूल्य वाणी में कहा कि इस संसार में कोई भी व्यक्ति गरीब नहीं है, क्योंकि हर जीव के पास उसकी अपनी अमूल्य और शाश्वत आत्मा विद्यमान है। मनुष्य केवल अपनी अज्ञानता और विपरीत मान्यताओं के कारण ही इस संसार रूपी सागर के दुखों में उलझा हुआ है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जिन भौतिक साधनों, मकान और धन-दौलत को अपना मानता है, वे वास्तव में उसके हैं ही नहीं। यदि ये चीजें अपनी होतीं तो जीव मृत्यु के बाद इन्हें अपने साथ ले जाता। अनादि काल से जीव इस भ्रम में जी रहा है कि यह मेरा परिवार है या मेरा बच्चा है। वास्तव में इस संसार चक्र में जीव न जाने कितनी बार किसका संबंधी बना और छूटा। केवल आत्मा ही एकमात्र सच्चा और शाश्वत तत्व है।

सांसारिक मोह के दुष्परिणामों को समझाते हुए मुनि ने एक मार्मिक कथा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्षों की तपस्या और आशीर्वाद के बाद जन्मे एक पुत्र की जब भरी जवानी में मृत्यु हो गई, तो उसके माता-पिता शोक में व्याकुल हो गए। उस समय गांव में पधारे एक अवधिज्ञानी मुनिराज ने बताया कि वह पुत्र वास्तव में उनके पूर्व जन्म का एक ईर्ष्यालु पड़ोसी था। उसने बदला लेने की भावना अर्थात निदान ध्यान करके पुत्र के रूप में जन्म लिया था, ताकि भरी जवानी में मरकर माता-पिता को गहरा दुख दे सके।

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मुनि ने समझाया कि यदि संतान जीवन में सुख दे तो समझना चाहिए कि वह पूर्व जन्म का कोई पुण्यात्मा जीव है, और यदि वह जीवनभर सताए या असमय दुख देकर चला जाए, तो समझना चाहिए कि पूर्व जन्म का कोई बैरी बदला लेने आया था। उन्होंने सचेत किया कि यदि मनुष्य मोह-माया के साथ मरण करेगा तो बार-बार नीची गतियों में भटकेगा, लेकिन यदि सांसारिक मोह त्याग कर आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलेगा तो उसका ऊर्ध्वगमन होगा।

पूजा-अर्चना और प्रवचन के पश्चात श्रद्धालुओं ने नवधा भक्ति के साथ मुनि संघ को आहार कराने का पुण्य लाभ लिया। मुनि आगम सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य मोना अक्षत जैन सपरिवार जगदलपुर वाले को प्राप्त हुआ।

मुनि पुनीत सागर को आहार देने का सौभाग्य अंजली निलेश जैन, निवास सुपर स्वीट्स के सामने वाली गली, बुढ़ापारा को प्राप्त हुआ। एलक धैर्य सागर को आहार देने का सौभाग्य दीपक, जिनेश कुमार, नवीन कुमार, राकेश, मुकेश, अनिमेश, निधि दीदी, मधु दीदी, राजकुमारी, प्रमोद कुमार एवं फूफाजी आरोन वाले को प्राप्त हुआ।

एलक स्वागत सागर का आज उपवास अर्थात व्रत रहा। इस समस्त धार्मिक आयोजन में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और मुनि के दर्शन कर धर्म लाभ उठाया।

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