छत्तीसगढ़

माओवाद पर बड़ी सफलता: हिड़मा समेत कई खतरनाक कमांडर ढेर, 26 हमलों का जिम्मेदार

By Admin|18 Nov 2025, 3:52 PM
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बस्तर 

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 देश में चल रहा माओवाद के खिलाफ अभियान अब अपने अंतिम दौर में है। माओवाद के ताबूत में एक और कील के रूप में सुरक्षा बल के जवानों में हिड़मा को मार गिराया है। छत्तीसगढ़ के सुकमा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर मंगलवार को जारी मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने 6 माओवादियों को मार गिराया है। इसमें कुख्यात माओवादी हिड़मा भी शामिल है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ में हिड़मा, उसकी पत्नी राजे और 25 लाख का इनामी माओवादी एसजेडसीएम टेक शंकर मारा गया है। यह इनकाउंटर सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी सफलता बतायी जा रही है। आंध्र-प्रदेश की ग्रे-हांउड टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है।

बता दें कि शीर्ष माओवादी नेताओं बसवा राजू, के. रामचंद्र रेड्डी (गुड्सा उसेंडी), के. सत्यनारायण रेड्डी (कोसा) के मारे जाने और भूपति, रूपेश, सुजाता व ककराला सुनीता जैसे वरिष्ठ कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद अब बस्तर में हिड़मा ही माओवादी संगठन का मुख्य नेता था। हिड़मा माओवादी संगठन की बटालियन नंबर-1 का प्रभारी और केंद्रीय समिति का सदस्य था। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के रडार था।

बटालियन कमांडर से केंद्रीय समिति सदस्य बना हिड़मा

माओवादी संगठन में हिड़मा का नाम पहली बार झीरम घाटी हमले के बाद चर्चाओं में आया था। पिछले वर्ष उसे केंद्रीय समिति का सदस्य बनाया गया, हालांकि पद की दृष्टि से वह अपेक्षाकृत नीचे है, लेकिन प्रभाव और पहचान के लिहाज से वह पिछले एक दशक से संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरा था।

हिड़मा के बारे में कुछ मुख्य तथ्य

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    जन्म: 1981, पूवर्ति, सुकमा (छत्तीसगढ़)
    पद: पीएलजीए बटालियन नंबर 1 का प्रमुख- माओवादियों की सबसे घातक हमलावर इकाई।
    वह CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था।
    वह बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी था।
    उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
    हिड़मा के साथ उसकी दूसरी पत्नी राजे (राजक्का) भी मारी गई।
    असली नाम: संतोष

मुख्य हमले जिनमें वह शामिल था

    2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद
    2013 झीरम घाटी नरसंहार: 27 लोग मारे गए, जिनमें शीर्ष कांग्रेसी नेता शामिल
    2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 सुरक्षा कर्मी शहीद

45 लाख का इनामी था हिड़मा

संगठन ने अब उसे केंद्रीय समिति सदस्य के साथ बटालियन नंबर-1 का प्रभारी नियुक्त किया है। उसकी जगह उसके ही गांव पूवर्ती के बारसे देवा को नया कमांडर बनाया गया है। हिड़मा पर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। हिड़मा देश की एकमात्र माओवादी बटालियन नंबर-1 का कमांडर रह चुका है, वही बटालियन जो देशभर में सबसे संगठित और घातक हमलों के लिए कुख्यात रही है।

हिड़मा की मां से मिले थे उपमुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कुछ दिनों पहले हिड़मा के गांव पूवर्ती पहुंचतक उसकी मां से मुलाकात की थी। उन्होंने हिड़मा से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि सरकार की प्राथमिकता मार्च 2026 तक बस्तर और आसपास के क्षेत्रों से माओवादी हिंसा का पूर्ण उन्मूलन है।

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