मध्य प्रदेशराज्‍य

टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध जारी, सरपंच के नाम जारी फर्जी NOC की जांच की मांग

By Admin|10 Oct 2026, 3:21 PM
f X W

रीवा 

रीवा जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आज कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। बोरहोल का काम कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परियोजना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विरोध की स्थिति बनी। सरई कला, रोझौही और आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि जब वे परमाणु बिजलीघर के पक्ष में नहीं हैं, तो उनकी आपत्तियों का निराकरण किए बिना आगे की प्रक्रिया क्यों की जा रही है।

अधिकारियों ने समझाया, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े
मौके पर सिरमौर तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर चाहिए, लेकिन परमाणु बिजलीघर से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर भी उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में दूसरे उद्योग स्थापित करने का विकल्प देने की मांग की।

कथित फर्जी एनओसी की जांच कराने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का मामला उठाया। उन्होंने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराने की मांग की। द्विवेदी के मुताबिक, ग्राम सभा में 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे।

READ ALSO  लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर सुरक्षा होगी चाक-चौबंद, तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर कैमरों से नजर

उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभा और स्थानीय ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी सहमति और आपत्तियों को स्पष्ट किए बिना आगे की प्रक्रिया कैसे की जा सकती है। ग्रामीणों ने भी ग्राम सभा के प्रस्तावों और एनओसी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

विकास चाहिए, लेकिन रेडिएशन का खतरा नहीं!
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, रेडिएशन और परमाणु कचरे को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े
बोरहोल की प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, एमपीआईडीसी, एनपीसीआईएल और टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका।

मौके पर सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन तथा टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी विरोध के दौरान उपस्थित थे।

READ ALSO  मुख्यमंत्री बोले- नारीशक्ति से मजबूत हो रहा प्रदेश, विकास में महिलाओं की अहम भागीदारी

कथित फर्जी एनओसी का मामला उठा, निष्पक्ष जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी बताए जा रहे पत्र क्रमांक 170/2026 की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि संबंधित ग्रामसभा और ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो फिर एनओसी किस आधार पर जारी की गई?

शिवानंद द्विवेदी ने दावा किया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को ग्रामसभा में इस परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामसभा के निर्णयों और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लेने की मांग की। हालांकि, एनओसी के फर्जी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

ग्रामीणों की चेतावनी—परियोजना निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन
लगातार विरोध के बीच अब प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा स्थानीय स्तर पर और अधिक गरमा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना को निरस्त नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित एनओसी विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर परियोजना को लेकर टकराव आगे भी जारी रहेगा?

फिलहाल, रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामसभा के अधिकारों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
विरोध प्रदर्शन में सरई कला की सरपंच कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच पति संजय सिंह,सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

READ ALSO  यूपी चुनाव की सरगर्मियां तेज: दो महीने तक नहीं होंगे प्रशासनिक तबादले

ग्रामीणों के विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों का निराकरण और मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी है। अब परियोजना की आगे की प्रक्रिया और ग्रामीणों की आपत्तियों पर प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button