CG : रायगढ़ में 10 साल बाद दिखा दुर्लभ रेड सैंड बोआ सांप …
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम धनागार में दुर्लभ प्रजाति का रेड सैंड बोआ सांप मिलने से ग्रामीणों के बीच चर्चा का माहौल है। बताया जा रहा है कि इस इलाके में करीब 10 साल बाद इस प्रजाति का सांप दिखाई दिया है। सांप मिलने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में उत्सुकता बढ़ गई। हालांकि, सर्प रक्षक समिति की टीम ने सांप का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया है।
गांव में मिला दुर्लभ प्रजाति का सांप जानकारी के अनुसार, ग्राम धनागार में दो दिन पहले रेड सैंड बोआ सांप दिखाई दिया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद विनीतेश और उनकी टीम ने सांप को पकड़ा। इसके बाद सर्प रक्षक समिति की टीम ने सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया। स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि लगभग एक दशक के बाद इस प्रजाति का सांप क्षेत्र में देखा गया है। हालांकि, पिछली बार इस प्रजाति का सांप कब मिला था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सर्प रक्षक समिति ने किया सुरक्षित रेस्क्यू सांप पकड़े जाने के बाद सर्प रक्षक समिति की टीम ने उसके संरक्षण और सुरक्षा को प्राथमिकता दी। टीम ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया, ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास में रह सके। रेड सैंड बोआ सांप का रेस्क्यू वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान पर छोड़ना उनके संरक्षण में अहम भूमिका निभाता है।
रेड सैंड बोआ सांप की क्या है खासियत? रेड सैंड बोआ को वैज्ञानिक भाषा में Eryx johnii कहा जाता है। यह एक विषहीन सांप है, जो मुख्य रूप से जमीन के अंदर और रेतीली या मुलायम मिट्टी वाले क्षेत्रों में रहता है। इस सांप की सबसे खास पहचान इसका मोटा शरीर और गोलाई लिए छोटी पूंछ है। इसकी पूंछ सिर जैसी दिखाई दे सकती है, जिसके कारण इसे आम बोलचाल में दोमुंहा सांप भी कहा जाता है। हालांकि, वास्तव में इसके दो सिर नहीं होते। यह प्रजाति आमतौर पर छोटे जीवों को खाकर प्राकृतिक खाद्य शृंखला में अपनी भूमिका निभाती है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण संदेश रेड सैंड बोआ को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे चमत्कारी या विशेष शक्तियों वाला सांप मानते हैं, जबकि ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। भारत में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इस प्रजाति को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इसका अवैध शिकार और व्यापार दंडनीय है। ग्राम धनागार में मिले इस सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़े जाने की घटना वन्यजीवों के प्रति जागरूकता का संदेश देती है। सांप दिखाई देने पर उसे मारने या स्वयं पकड़ने के बजाय प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम अथवा वन विभाग को सूचना देना सुरक्षित तरीका है।




