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CG : किसानों को बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केंद्रों में बनेगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर …

By lokesh sharma|10 Jul 2026, 3:51 PM
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रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने बलौदाबाजार जिले के ग्रामीण अंचलों में धान खरीदी व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और किसान हितैषी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से जिले के धान उपार्जन केंद्रों में बड़े पैमाने पर शेड-सह-चबूतरा निर्माण के कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह पहल विशेष रूप से बलौदाबाजार, पलारी और सिमगा विकासखंड के उन हजारों किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी, जो हर खरीफ सीजन में अपनी फसल बेचने इन केंद्रों पर पहुंचते हैं। प्रशासनिक आदेश के अनुसार जिले के 30 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों की तस्वीर बदलने के लिए प्रत्येक केंद्र को 10 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसकी आधिकारिक मंजूरी 23 जून 2026 को जारी की गई।

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’यह निर्माण नहीं, किसान सुविधा का विस्तार है – मंत्री श्री टंक राम वर्मा’

      इस जनहितैषी पहल पर बात करते हुए राज्य के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की मेहनत का सम्मान करने और खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह सुचारू बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। धान उपार्जन केंद्रों में शेड और चबूतरों का निर्माण केवल एक ढांचागत काम नहीं, बल्कि किसान सुविधा का बुनियादी विस्तार है। क्डथ् निधि का मुख्य उद्देश्य ही खनिज प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जिससे जनता को सीधा लाभ मिले। इस अधोसंरचनात्मक सुधार से केंद्रों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और किसानों को एक बेहतर व सुविधाजनक माहौल मिलेगा। इस महत्वपूर्ण निर्णय से साफ है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले धान खरीदी केंद्रों को मजबूत कर, सरकार सीधे तौर पर किसानों के हितों को सुरक्षित कर रही है।

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’इन क्षेत्रों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ’

     इस योजना के तहत सिमगा विकासखंड के सकरी, भटभेरा, गोरदी, जांगड़ा, केसली, हिरमी, सुहेला, सकलोर, शिकारी-केसली, रावन, मोहरा, बिटकुली, नवापारा, फूलवारी, फरहदा, जरौद और हथबंद जैसे प्रमुख केंद्रों में निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसी तरह बलौदाबाजार विकासखंड के सकरी, लटुवा, रिसदा, रसेड़ा, मोहतरा, कुकुरदी, बलौदाबाजार, धंवई, सलौनी, देवरी, दशरमा, खम्हरिया (चांपा), करमदा और अर्जुनी के उपार्जन केंद्रों का भी कायाकल्प किया जाएगा।

’खुले में धान रखने की मजबूरी से मिलेगी मुक्ति’

      अब तक पुख्ता इंतजाम न होने के कारण किसानों को अपनी मेहनत की उपज खुले आसमान के नीचे रखनी पड़ती थी, जिससे अचानक होने वाली बारिश, तेज धूप और जमीन की नमी से धान खराब होने का खतरा हमेशा बना रहता था। अब नए शेड और ऊंचे चबूतरों के बन जाने से फसल पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। इसके साथ ही केंद्रों पर तौल (तुलवाई) और बोरियों के भंडारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, जिससे कामकाज में तेजी आएगी और किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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