उत्तर प्रदेशराज्‍य

पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ‘बीमारू’ से रेवेन्यू सरप्लस राज्य बना, वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन से अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय हुई तीन गुना

By Admin|04 May 2026, 9:01 PM
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लखनऊ

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 “उत्तर प्रदेश आज बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को भी अपने वित्तीय संसाधनों से पूरा करने की क्षमता रखता है। देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे में शामिल करीब 600 किलोमीटर के गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण बिना बैंकों से कर्ज लिए पूरा किया गया। इसमें 36,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ। एक्सप्रेसवे के किनारे नौ इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए करीब 7,000 एकड़ अतिरिक्त जमीन ली गई है। इंडस्ट्रियल क्लस्टर व लॉजिस्टिक हब को मिलाकर पूरी परियोजना पर 42,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। वर्ष 2017 से पहले यह स्थिति नहीं थी, प्रदेश को ‘बीमारू’ माना जाता था। कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान राज्य को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं था। लेकिन, अब यूपी ‘रेवेन्यू सरप्लस स्टेट’ है।” ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के लिए नवचयनित 371 लेखा परीक्षकों एवं स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के लिए नवचयनित 129 लेखा परीक्षकों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कहीं। अपने संबोधन से पहले सीएम ने नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए।

2017 में मेरा फोन उठाने को तैयार नहीं थे बैंकों के अधिकारी  
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जब हमने सरकार बनाई, खजाना खाली था। हमें अपने चुनावी वादों को निभाना था, लेकिन किसी भी बैंक का चेयरमैन या सीएमडी मेरा फोन उठाने को तैयार नहीं था। यानी, यूपी को कर्जा नहीं देना है।  ऐसी छवि बना दी गई थी हमारे प्रदेश की। तब उस कठिन दौर में हमने तय किया कि बैंकों या वित्तीय संस्थानों पर निर्भर रहने के बजाय हम अपने संसाधन बढ़ाएंगे, वित्तीय अनुशासन मजबूत करेंगे और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण पेश करेंगे। हमने इसे साबित भी किया। यदि हमने भी वित्तीय प्रबंधन नहीं किया होता, ऊल-जुलूल खर्च होते, बिना बजट पैसा रेवड़ियों की तरह बांटा जाता और बिना वित्तीय अनुशासन अनावश्यक कर्ज लिया जाता, तो आज यूपी के लोगों पर कर्ज का भारी बोझ होता। वित्त विभाग की टीम, स्थानीय लेखा और पंचायत लेखा से जुड़े परीक्षकों ने एक आंतरिक इकाई के रूप में मिलकर काम किया और मजबूत वित्तीय ढांचा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। परिणाम यह रहा कि यूपी न सिर्फ रेवेन्यू सरप्लस राज्य बना, बल्कि  राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और प्रदेश के बजट को तीन गुना करने में सफलता मिली। इसीलिए गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए तमाम बैंकों व वित्तीय संस्थानों ने लाइन लगाकर कहा कि हम पैसा देना चाहते हैं। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि अब उत्तर प्रदेश बदल चुका है, वह अपने दम पर बड़ी परियोजनाएं पूरी करने में सक्षम है। हमें पिछली सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज को कम करने में भी सफलता मिली है।

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वित्तीय अनुशासनहीनता व कुप्रबंधन का उदाहरण है अधूरा जेपीएनआईसी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है, जबकि पहले यह बॉटम-3 में शामिल था। अब हर निवेशक और वित्तीय संस्थान प्रदेश में निवेश करना चाहता है। सपा सरकार के दौरान 2017 से पहले लखनऊ में शुरू हुए जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) प्रोजेक्ट की लागत 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन खर्च बढ़कर 860 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और इसके बावजूद परियोजना अधूरी है। यह वित्तीय अनुशासनहीनता और कुप्रबंधन का गंभीर उदाहरण है। यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है। यह एक महापुरुष के नाम को अपमानित करने जैसा है। सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश को एक्साइज से मात्र 12 हजार करोड़ रुपये की आय होती थी, जो अब बढ़कर 62-63 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी लीकेज पर लगाम से हुई है। ये लीकेज तकनीकी खामियों से नहीं थे, बल्कि नेताओं और सरकारी तंत्र के कुछ लोगों द्वारा प्रदेश के राजस्व में डकैती डाली जा रही थी। जो पैसा विकास में लगना चाहिए था, वह दुरुपयोग और लूट का शिकार हो रहा था। लगभग हर क्षेत्र में यही स्थिति थी।

आत्मनिर्भर बनने की पहली शर्त वित्तीय अनुशासन व प्रभावी प्रबंधन

सीएम ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने की पहली शर्त वित्तीय अनुशासन और प्रभावी प्रबंधन है। ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत, ये सभी इकाइयां विकास की आधारशिला हैं। विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार करना है, तो गांव और शहर दोनों स्तरों पर मजबूत वित्तीय ढांचा बनाना होगा। स्थानीय निकायों व पंचायतों को वित्तीय अनुशासन और प्रबंधन के गुण सिखाना बेहद जरूरी है। इंटरनल ऑडिट की भूमिका इस दिशा में अहम है। नवचयनित अभ्यर्थियों में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसने किसी प्रकार की सिफारिश कराई हो। भर्ती प्रक्रिया इतने गोपनीय तरीके से संचालित की जाती है कि मुझे, वित्तमंत्री या अपर मुख्य सचिव (वित्त) को भी कोई जानकारी नहीं होती। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष इस कार्यक्रम में मौजूद हैं, लेकिन कोई नहीं जानता होगा कि उन्हीं के नेतृत्व में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई।

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वर्ष 2017 से पहले भर्ती में चाचा-भतीजा संस्कृति हावी 

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं से लेकर विभिन्न आयोगों तथा पुलिस भर्ती की परीक्षाओं में पेपर लीक आम बात थी। तब चाचा-भतीजा संस्कृति हावी थी और विभिन्न स्तरों से सिफारिशों की सूचियां आती थीं। जहां 50 पद होते थे, वहां 75 लोगों की भर्ती कर दी जाती थी, जिससे विवाद खड़े होते थे और मामले अदालत चले जाते थे। नुकसान युवाओं को उठाना पड़ता था। वर्तमान व्यवस्था में हर धर्म-जाति व क्षेत्र के योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिला है। आज गोरखपुर का एक सिख युवक और लखनऊ की एक मुस्लिम युवती भी चयनित हुई है, जो प्रमाण है कि बिना किसी भेदभाव के योग्यता के आधार पर चयन किया गया। हमारी नीति अपराध और अपराधियों के साथ-साथ भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के प्रति भी ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।

एमएसएमई सेक्टर में करीब 3 करोड़ को मिला रोजगार 

सीएम ने कहा कि प्रदेश में आज बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सहकारी समिति और पंचायती लेखा परीक्षा में चयनित 371 अभ्यर्थियों में 78 महिलाएं शामिल हैं, जबकि स्थानीय निधि लेखा परीक्षा में चयनित 129 अभ्यर्थियों में 25 बेटियों ने स्थान प्राप्त किया है। निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के कारण ही बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिल रहा है। अब तक प्रदेश में 9 लाख से अधिक लोगों को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। लगातार नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे हैं और पिछले एक महीने में यह चौथा या पांचवां ऐसा कार्यक्रम है। इन भर्तियों की पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। हमारी सरकार की नीतियों से एमएसएमई सेक्टर में करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। विभिन्न योजनाओं के जरिए युवाओं और महिलाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें “ड्रोन दीदी”, “लखपति दीदी”, “बीसी सखी”, दुग्ध उत्पादन, पीएम स्टार्टअप, पीएम स्टैंडअप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, सचिव वित्त संदीप कौर, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एसएन साबत आदि उपस्थित थे।

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