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40 लाख हेक्टेयर भूमि सुरक्षित, यूपी में नया फ्लड कंट्रोल सिस्टम लागू

By Admin|08 May 2026, 8:48 PM
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लखनऊ

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 उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा।

प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है।

अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके।

लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था।

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नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद
इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा।

योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा।

योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

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