उत्तर प्रदेशराज्‍य

कृत्रिम गर्भाधान और नई तकनीक से बढ़ेगा दूध उत्पादन

By Admin|25 Apr 2026, 1:41 PM
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लखनऊ

यूपी में करीब और 190.20 लाख गोवंश 330.10 लाख भैंस हैं। इसमें प्रजनन योग्य 89.36 लाख गाय और 153.12 लाख भैंस हैं। इसमें करीब एक लाख गाय भैंस में समय से गर्भ धारण नहीं करने की समस्या पाई जाती है। अभी तक पशुओं के गर्भवती होने की जांच तीन माह में हो पाती हैं। यदि कोई गाय या भैंस गर्भ नहीं धारण की है तो तीन से चार माह बाद ही उसे दोबारा गर्भ धारण कराया जाता है। इस अंतर को कम करने की तैयारी है। इसके लिए प्रदेश में आईटी इनैबल्ड पशु गर्भपरीक्षण प्रयोगशाला बनाई जा रही है।

इन प्रयोगशाला में किट के जरिये 28 दिन में ही जांच हो सकेगी। यदि कोई गाय भैस गर्भवती नहीं हुई है तो किसान माहभर बाद ही उसे दोबारा सीमेन चढ़वा सकेगा। साथ ही पशु चिकित्सक से संपर्क करके उसका उपचार भी करा सकेगा। इसकी शुरुआत बुंदेलखंड, पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच ब्लॉकों से की जा रही है। यानी हर क्षेत्र में एक-एक ब्लॉक का चयन किया जा रहा है।

कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दूध उत्पादन
बढ़ाने के लिए अतिहिमीकृत वीर्य द्वारा कृत्रिम गर्भाधान को बढावा दिए जाने की नीति बनाई गई है। सभी पशु अस्पतालों में हिमीकृत बीज रखने के लिए अलग अत्याधुनिक लैब भी बनाई जा रही है। इसी तरह विदेशी नस्ल के सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराकर संकर नस्ल तैयार कर दूध की मात्रा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

किसानों को दी जाएंगी गाय
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि कई गौशाला में अच्छी नस्ल की गायें हैं। इन गायों का उपचार कराया गया है। कुछ गर्भवती भी हैं। इन्हें किसानों को दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बुदेलखंड में यह प्रयोग काफी सफल रहा है।

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