छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

CG : पशुपालन डिप्लोमा के 7 छात्रों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत! 5 नवंबर तक पंजीयन का आदेश …

By kadwaghut|03 Nov 2026, 10:52 AM
f X W

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पशु चिकित्सा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा और पशुपालन डिप्लोमा पाठ्यक्रम में अध्ययनरत सात विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि संबंधित विद्यार्थियों को 5 नवंबर 2026 तक पंजीयन कराने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही संबंधित विश्वविद्यालय को 5 और 6 नवंबर को पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह अंतरिम व्यवस्था की है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। यह मामला मनोहर यादव सहित सात विद्यार्थियों की याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद उन्हें डिप्लोमा पाठ्यक्रम में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति नहीं दी गई। इस कारण उनके पंजीयन और आगे की शिक्षा पर संकट खड़ा हो गया था।

दो सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी, फिर भी अनुमति को लेकर विवाद मामले की शुरुआत उन विद्यार्थियों की याचिकाओं से हुई, जिन्हें पशु चिकित्सा पॉलिटेक्निक और पशुपालन डिप्लोमा पाठ्यक्रम में अनंतिम प्रवेश दिया गया था। विद्यार्थियों ने दो सेमेस्टर की पढ़ाई भी पूरी कर ली थी। इसके बावजूद आगे की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। 13 अगस्त 2026 को जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने मनोहर यादव और संबंधित याचिकाओं का निराकरण करते हुए विद्यार्थियों के पक्ष में आदेश दिया था। अदालत ने पाया था कि समान परिस्थितियों वाले अन्य अभ्यर्थियों को पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को आगे की पढ़ाई से वंचित करने पर उनकी अब तक की शैक्षणिक मेहनत प्रभावित हो सकती थी।

READ ALSO  CG News: सड़क किनारे प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला की मदद को आगे आई पेट्रोलिंग टीम, जन्मा बच्चा

हाईकोर्ट ने पहले भी दिया था पढ़ाई जारी रखने का निर्देश 13 अगस्त के आदेश में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों द्वारा विद्यार्थियों को अनुमति नहीं देने वाले आदेश उनके संबंध में निरस्त कर दिए थे। अदालत ने राज्य शासन को निर्देश दिया था कि 30 जुलाई 2026 को बनाई गई नीति और समान परिस्थितियों वाले अभ्यर्थियों के मामलों को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल कराने सहित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने आदेश की प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर संबंधित कार्रवाई करने को कहा था। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि विद्यार्थियों को दी गई राहत मामले की विशेष परिस्थितियों पर आधारित है। इसे अन्य मामलों में सामान्य नियम या मिसाल नहीं माना जाएगा।

आदेश का पालन नहीं होने पर दाखिल हुई अवमानना याचिका 30 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गगन तिवारी ने अदालत को बताया कि 13 अगस्त के आदेश का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि आदेश का पालन नहीं होने के कारण अवमानना याचिका भी दाखिल की गई है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करने और उन्हें पंजीयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति देने का आग्रह किया गया।

सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने का लिया निर्णय सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाई.एस. ठाकुर ने अदालत को बताया कि सरकार ने 13 अगस्त के आदेश को चुनौती देने के लिए रिट अपील दायर करने का निर्णय लिया है। शासन की ओर से बताया गया कि इसी कारण विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम जारी रखने की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि 30 अक्टूबर को सुनवाई के समय तक किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष संबंधित अपील दाखिल नहीं की गई थी। अदालत ने इस स्थिति और पंजीयन के लिए उपलब्ध सीमित समय को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों के हित में अंतरिम निर्देश जारी किए। 5 और 6 नवंबर को पूरी होगी पंजीयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय की ओर से अदालत को बताया गया कि 15 अक्टूबर को पंजीयन कार्यक्रम जारी किया गया था। इसके अनुसार विद्यार्थियों का पंजीयन 29 और 30 अक्टूबर को निर्धारित था। लेकिन पूर्व आदेश का पालन नहीं होने के कारण संबंधित विद्यार्थियों के पंजीयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित मामले में विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था आवश्यक है। अदालत ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को 5 नवंबर तक पंजीयन की अनुमति प्रदान की जाए। वहीं संबंधित विश्वविद्यालय को 5 और 6 नवंबर 2026 को पंजीयन प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए। यह व्यवस्था संबंधित याचिकाकर्ताओं के लिए है। इसे सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य पंजीयन अवधि बढ़ाए जाने का आदेश नहीं समझा जाना चाहिए। 18 नवंबर को होगी अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने मनोहर यादव सहित संबंधित सभी याचिकाओं की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित की है। आगामी सुनवाई में पूर्व आदेश के अनुपालन, सरकार की संभावित अपील और अन्य संबंधित पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल अदालत के अंतरिम निर्देश से सात विद्यार्थियों को पंजीयन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिला है। हालांकि मामले का अंतिम न्यायिक निराकरण अभी शेष है। इस फैसले से स्पष्ट होता है कि अदालत ने विद्यार्थियों की अब तक की पढ़ाई और पंजीयन की सीमित समय-सीमा को विशेष महत्व दिया है।

READ ALSO  CG : छत्तीसगढ़ के बेरोजगार युवाओं के लिए आज सुनहरा मौका! धमतरी में 630 से ज्यादा पदों पर भर्ती ....

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

2

Back to top button