CG : छत्तीसगढ़ में आज से बदलेगा मौसम, 2 दिन भारी बारिश की चेतावनी; चक्रवात ‘मुरासु’ का दिखेगा असर …
रायपुर : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने शक्तिशाली चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ के प्रभाव से प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार 3 और 4 नवंबर को छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। विशेष रूप से दक्षिण छत्तीसगढ़ और बस्तर संभाग के इलाकों में बारिश का असर अधिक रहने की आशंका है। गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए नए तूफान ‘मुरासु’ ने एक बार फिर पूर्वी और दक्षिणी भारत में मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ा दी हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के लिए बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
छत्तीसगढ़ में 3 और 4 नवंबर को भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक चक्रवाती तूफान मुरासु के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश का प्रभाव अधिक रहने की संभावना है। बस्तर संभाग सहित आसपास के क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। गरज-चमक के साथ बारिश होने की स्थिति में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का खतरा भी बना रह सकता है। मौसम विभाग के उपखंडवार पूर्वानुमान में 3 नवंबर के लिए भारी बारिश की चेतावनी दर्ज है। हालांकि स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।
बंगाल की खाड़ी में ताकतवर हुआ चक्रवात ‘मुरासु’ भारत मौसम विज्ञान विभाग के 2 नवंबर के बुलेटिन के अनुसार पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मुरासु गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले चुका था। 2 नवंबर को शाम 5:30 बजे इसकी स्थिति आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से लगभग 80 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व और ओंगोल से करीब 110 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में दर्ज की गई थी। तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा था। IMD ने इसके दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास पहुंचने का पूर्वानुमान जारी किया था। 3 नवंबर की सुबह सामने आई रिपोर्ट के अनुसार चक्रवात ने आंध्र प्रदेश के तट को पार कर लिया है। इसलिए इसे अब केवल तट से टकराने वाला संभावित तूफान बताना सही नहीं होगा।
120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची हवाओं की रफ्तार मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में चक्रवात के प्रभाव से 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का पूर्वानुमान जारी किया था। इस तूफान के कारण तटीय इलाकों में तेज बारिश, हवाओं और समुद्र की खराब स्थिति को लेकर विशेष चेतावनी दी गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि 120 किमी प्रति घंटे की चेतावनी आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र के लिए थी, पूरे छत्तीसगढ़ के लिए नहीं। छत्तीसगढ़ में हवाओं की गति और बारिश की तीव्रता स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
बस्तर सहित दक्षिण छत्तीसगढ़ में बारिश का अधिक असर चक्रवात मुरासु के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की आशंका है। बस्तर संभाग के जिलों में बादल छाए रहने के साथ रुक-रुककर बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश की स्थिति भी बन सकती है। लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण सड़कों पर आवागमन प्रभावित होने की संभावना रहती है। विशेष रूप से नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि सभी जिलों में समान मात्रा में बारिश होगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। जिलेवार चेतावनी के लिए मौसम केंद्र रायपुर का नवीनतम बुलेटिन देखना आवश्यक है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में भी बारिश की चेतावनी मुरासु का सबसे अधिक प्रभाव आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में रहने का पूर्वानुमान था। तेलंगाना में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दक्षिण ओडिशा और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में बारिश का असर रहने की आशंका है। चक्रवात का प्रभाव उसके मार्ग, रफ्तार और जमीन पर पहुंचने के बाद होने वाले कमजोर पड़ने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए अलग-अलग राज्यों में बारिश और हवा की तीव्रता में अंतर हो सकता है। चक्रवात मुरासु का नाम किसने रखा? चक्रवात ‘मुरासु’ का नाम भारत ने प्रस्तावित किया था। मुरासु एक तमिल शब्द है, जिसका अर्थ पारंपरिक नगाड़ा या युद्ध के समय बजाया जाने वाला ढोल होता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संबंधित क्षेत्रीय देशों की स्वीकृत सूची के अनुसार उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम निर्धारित किए जाते हैं। इस सूची में मुरासु नाम भारत की ओर से दिया गया है।




