छत्तीसगढ़

CG : ‘आदिवासी हैं, बासी खाना खा लेंगे’ कहने का आरोप, छत्तीसगढ़ में प्राचार्या के खिलाफ छात्रों ने उठाई आवाज …

By kadwaghut|03 Nov 2026, 10:31 AM
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कोंडागांव : छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शामपुर के विद्यार्थियों ने भोजन की गुणवत्ता और प्रबंधन के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का आरोप है कि एक्सपायरी खाद्य सामग्री की शिकायत करने पर प्राचार्या चंद्रकिरण तिवारी ने आदिवासी पहचान को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की। नईदुनिया की रिपोर्ट में विद्यार्थियों के हवाले से कथित टिप्पणी का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और प्राचार्या का जवाब उपलब्ध नहीं है।

विद्यार्थियों का आरोप है कि शिकायतों का समाधान करने के बजाय उनकी बात को नजरअंदाज किया गया। मामला केवल भोजन तक सीमित नहीं है। छात्रावास की सुविधाओं और विद्यार्थियों के साथ व्यवहार को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विद्यालय में किन स्तरों पर कमियां थीं और संबंधित कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। लल्लूराम की रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थी और अभिभावक शनिवार को कलेक्टोरेट पहुंचे और दोपहर तीन बजे से रात दस बजे तक धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों ने प्राचार्या के साथ छात्रावास अधीक्षक और अधीक्षिका को निलंबित करने की मांग की। उनका आरोप है कि बच्चों को कथित जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था।

प्रदर्शनकारियों ने छात्रावास में टूटे दरवाजों और गंदे शौचालयों जैसी समस्याएं भी उठाईं। शिकायतों में बालिकाओं के शौचालय में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने का गंभीर आरोप भी शामिल है। कैमरे की वास्तविक स्थिति, उसकी दिशा और उपयोग से संबंधित तथ्य जांच से स्पष्ट होने बाकी हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इन शिकायतों पर प्रबंधन का विस्तृत पक्ष नहीं दिया गया है। विद्यालय की एक शिक्षिका ने भी कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी बिलिंग की जांच की मांग की है। ये आरोप भोजन और छात्रावास संबंधी शिकायतों से अलग सत्यापन की मांग करते हैं। संबंधित खरीद दस्तावेजों, बिलों और भुगतान रिकॉर्ड की जांच के बिना किसी वित्तीय गड़बड़ी को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

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रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन ने तीन नवंबर को जांच समिति गठित करने का आश्वासन दिया था। प्रस्तावित समिति में प्रशासन के तीन और पालकों की ओर से दो सदस्य शामिल किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, समिति गठित होने का आदेश या उसकी जांच रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए जांच शुरू होने अथवा आरोप सिद्ध होने का दावा फिलहाल नहीं किया जा सकता। मामले में विद्यार्थियों की शिकायतें दर्ज करना, भोजन और छात्रावास की वास्तविक स्थिति देखना तथा संबंधित कर्मचारियों को जवाब देने का अवसर देना महत्वपूर्ण होगा। कथित टिप्पणी के संबंध में भी प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। किसी समुदाय के बच्चों की शिकायत को उनकी पहचान के आधार पर कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।

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