राजनांदगांव : आराधना व श्रद्धा कभी कम नहीं होनी चाहिए…

राजनांदगांव | ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में गुरुवार को खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर शिष्य मुनि समयप्रभ सागर ने कहा कि कोई भी अपने बच्चों को खराब नहीं बताता बल्कि जो नहीं है वह भी बताता है। ऐसा कर हम बच्चे के प्रति ठीक व्यवहार नहीं कर रहे हैं। इस तरह की बातों से उसे और बल मिलता है। आराधना से हम अभिव्यक्ति पर कंट्रोल कर सकते हैं। आराधना और श्रद्धा यह दोनों कभी कम नहीं होनी चाहिए बल्कि बढ़नी चाहिए।
सामूहिक आराधना बहुत दुर्लभ है। हमें धर्म के प्रति आस्था होनी चाहिए। हमें सामूहिक आराधना का लाभ उठाना चाहिए। सामूहिक आराधना से एक पॉजिटिव एनर्जी निकलती है जो हमारे सबके लिए काफी लाभदायक है। मुनिश्री ने कहा कि आराधना से पूर्व के पाप भी धुल जाते हैं और अंतिम आराधना अच्छे भव की ओर ले जाती है। भावों के आधार पर कर्म का निर्धारण होता है। कहा कि बुरे कर्मों को छोड़ो और अच्छे कर्मों से जुड़ो। बुरे कर्मों के लिए मिच्छामी दुक्कडम कहो और अच्छे कर्मों से अपने जीवन को सार्थक करो।



