छत्तीसगढ़

गाईडलाइन दरों को लेकर फैल रहे भ्रम पर राज्य सरकार ने दी व्यापक स्पष्टता

By Admin|09 Dec 2025, 8:24 PM
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कांकेर सहित पूरे प्रदेश में सरल, वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रणाली लागू

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रायपुर
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड छत्तीसगढ़ द्वारा स्वीकृत नई गाईडलाइन दरों को लेकर आमजन के बीच उत्पन्न हो रहे भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विस्तृत जानकारी जारी की है। शासन ने स्पष्ट किया है कि नई गाईडलाइन दरें न केवल अधिक सरल और वैज्ञानिक हैं, बल्कि इनके माध्यम से पुराने वर्षों से चली आ रही विसंगतियों का समाधान भी किया गया है।

सरकार ने बताया कि कुछ स्थानों पर यह गलत भ्रम फैलाया जा रहा है कि गाईडलाइन दरों में अत्यधिक वृद्धि की गई है या दस्तावेज पंजीयन प्रक्रिया बाधित हो गई है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि नवीन गाईडलाइन 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी है और इस अवधि में कांकेर जिले में लगभग 98 दस्तावेजों का पंजीयन सुचारू रूप से किया जा चुका है। जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पूर्ववत नियमित रूप से पंजीयन का कार्य जारी है।

नगरीय क्षेत्रों में व्यापक सरलीकरण
पूर्व में एक ही वार्ड में कई कंडिकाओं के कारण समान भौगोलिक और व्यावसायिक स्थिति होने के बावजूद दरों में अंतर पाया जाता था, जिससे नागरिकों में असंतोष था। नवीन सर्वे, भौतिक सत्यापन तथा युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बाद इन कंडिकाओं को कम किया गया है और दरों को समान किया गया है। कांकेर नगर पालिका के 21 वार्डों में पहले 56 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 26 कर दिया गया है। इसी प्रकार नगर पंचायत चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और पंखाजूर की कुल 253 कंडिकाओं को कम कर 105 किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे गाईडलाइन अब अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हो गई है।

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दर वृद्धि संबंधी भ्रांति का समाधान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अंतिम बार गाईडलाइन दरों का पुनरीक्षण वर्ष 2019-20 में किया गया था। छह वर्षों बाद किए जा रहे इस पुनरीक्षण में नगरीय क्षेत्रों में मात्र 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि स्वाभाविक और तार्किक है। यदि दरों को हर वर्ष बढ़ाया जाता, तो वर्तमान दरें कहीं अधिक होतीं। अतः अत्यधिक वृद्धि की बात निराधार है।

ई-पंजीयन प्रणाली पूरी तरह सुचारू
कुछ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नई गाईडलाइन ऑनलाईन अपडेट न होने से दस्तावेज पंजीयन ठप हो गया है, जबकि तथ्य यह है कि जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पंजीयन का कार्य निर्बाध रूप से चल रहा है और किसी भी प्रकार की व्यवधान की स्थिति नहीं है।

दर पुनरीक्षित न होने से होने वाली समस्याओं का उल्लेख
सरकार ने कहा है कि पुरानी गाईडलाइन दरें जारी रहने से काले धन के लेनदेन को प्रोत्साहन मिलता है। कई बार वास्तविक सौदा मूल्य अधिक होने के बावजूद पंजीयन पुरानी गाईडलाइन दरों पर किया जाता है, जिसके कारण अंतर की राशि काला धन बनती है और बाद में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इसी प्रकार पुरानी दरों के कारण संपत्तियों का मूल्यांकन कम होता है, जिससे खरीदारों को ऋण पात्रता भी कम मिलती है।

मुआवजे के निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आती हैं। सरकारी अधिग्रहण की स्थिति में पुराने दरों के आधार पर मुआवजा तय होने से भूमि मालिकों, विशेषकर किसानों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसलिए नई गाईडलाइन दरें अधिक युक्तियुक्त और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हैं।

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आमजन से अपील
राज्य शासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रम में न आएं। गाईडलाइन दरों से संबंधित किसी भी सूचना या शंका के निराकरण के लिए नागरिक अपने निकटस्थ पंजीयन कार्यालय में संपर्क कर वास्तविक और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

नई गाईडलाइन दरों को प्रदेश में रियल एस्टेट लेनदेन को पारदर्शी बनाने, टैक्स चोरी रोकने और जमीन संबंधी मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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