CG : बिलासपुर में जमीन के नाम पर 10 लाख की ठगी, प्रॉपर्टी डीलर गिरफ्तार …
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में जमीन की खरीदी-बिक्री के नाम पर 10 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक जमीन कारोबारी ने आदिवासी महिला सहित अन्य लोगों के नाम पर दर्ज जमीनों को बेचने का सौदा कर खरीदार से लाखों रुपए एडवांस ले लिए। इसके बाद जब जमीन की रजिस्ट्री कराने का समय आया तो कारोबारी टालमटोल करने लगा। शिकायतकर्ता ने जमीन के स्वामित्व और दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। मामले की
गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइन थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और दस्तावेजों से संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी प्रॉपर्टी डीलर प्रफुल्ल झा को गिरफ्तार कर लिया है। 70 लाख रुपए प्रति एकड़ में तय हुआ था जमीन का सौदा जानकारी के मुताबिक, दयालबंद निवासी विशालचंद्र केसरी ने भारतीय नगर निवासी जमीन कारोबारी प्रफुल्ल झा के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, 10 दिसंबर 2025 को जमीन खरीदने का सौदा 70 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से तय हुआ था। सौदे के तहत खरीदार ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से 10 लाख रुपए की अग्रिम राशि का भुगतान किया था। आरोप है कि रकम लेने के बाद प्रॉपर्टी डीलर ने जमीन की बिक्री के लिए एग्रीमेंट किया, लेकिन निर्धारित समय पर रजिस्ट्री नहीं कराई।
आदिवासी महिला के नाम दर्ज जमीन का किया सौदा शिकायत के मुताबिक, जमीन कारोबारी प्रफुल्ल झा ने गोंड आदिवासी समुदाय की महिला चंद्रकली बाई के नाम दर्ज जमीन बेचने का सौदा किया था। सकरी तहसील के अमेरी क्षेत्र में स्थित खसरा नंबर 232 की 0.2430 हेक्टेयर जमीन राजस्व रिकॉर्ड में चंद्रकली बाई के नाम पर दर्ज बताई गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रफुल्ल झा ने कृष्णा दुआ के नाम से जारी मुख्तियारनामे के आधार पर जमीन बेचने का अधिकार होने का दावा किया था। इसी भरोसे पर विशालचंद्र केसरी ने सौदा किया और अग्रिम राशि का भुगतान किया। बाद में जमीन के वास्तविक स्वामित्व और मुख्तियारनामे की वैधता को लेकर सवाल खड़े हो गए।
एग्रीमेंट के बाद भी नहीं कराई जमीन की रजिस्ट्री शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन का सौदा तय होने और एडवांस राशि देने के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन निर्धारित समय आने पर आरोपी कथित तौर पर अलग-अलग कारण बताकर रजिस्ट्री टालने लगा। विशालचंद्र केसरी का आरोप है कि एग्रीमेंट में शामिल कुछ जमीनें राजस्व रिकॉर्ड में अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज थीं। ऐसे में संबंधित जमीनों को बेचने के अधिकार पर संदेह पैदा हुआ। लगातार रजिस्ट्री नहीं होने और दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस की मदद ली।
दोबारा हुआ अनुबंध, फिर भी नहीं मिली जमीन मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शिकायत के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को मसानगंज और तोरवा क्षेत्र की जमीनों के लिए भी अनुबंध किया गया था। इसके बावजूद किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बार-बार अनुबंध और आश्वासन के बाद भी जमीन का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया गया। विशालचंद्र केसरी ने अपनी शिकायत में 10 मई 2026 को सिविल लाइन थाने में प्रफुल्ल झा के खिलाफ दर्ज एक अन्य एफआईआर का भी उल्लेख किया है। पुलिस इस जानकारी की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला शिकायत मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336, 338 और 340 के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपी जमीन कारोबारी प्रफुल्ल झा को गिरफ्तार कर लिया है। अब जमीन के एग्रीमेंट, मुख्तियारनामे और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को संबंधित जमीनों की बिक्री का वैधानिक अधिकार था या नहीं। एडिशनल एसपी ने की गिरफ्तारी की पुष्टि एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि शिकायत के आधार पर अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड, एग्रीमेंट और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ अन्य शिकायतों से जुड़े तथ्यों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है। दस्तावेजों के सत्यापन और जांच पूरी होने के बाद ही कथित धोखाधड़ी की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।



