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Hanuman Ashtami 2025: तिथि, महत्व और पूजा विधि जानें, कैसे दूर होते हैं शनि-मंगल के दुष्प्रभाव

By Manish Kumar|12 Dec 2025, 11:19 AM
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हर वर्ष पौष कृष्ण अष्टमी तिथि को भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान अष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन भक्त विशेष विधि-विधान के साथ हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं और मंदिरों में दिनभर उत्सव जैसा माहौल रहता है। सुबह से ही हनुमान मंदिरों में अभिषेक, पूजा-पाठ और शाम को हनुमान आरती का आयोजन होता है। कई स्थानों पर भंडारे भी आयोजित किए जाते हैं।

आइए जानते हैं कि हनुमान अष्टमी क्यों मनाई जाती है और किस विधि से पूजा करने पर ग्रहदोष शांत होते हैं।

क्यों मनाई जाती है हनुमान अष्टमी?

पुराणों के अनुसार त्रेतायुग में हनुमान जी पाताल लोक में गए थे, जहां उन्होंने अहिरावण का वध करके श्रीराम और लक्ष्मण का बचाव किया। इसी विजय के उपलक्ष्य में यह तिथि हनुमानजी को समर्पित मानी जाती है।

एक मान्यता यह भी है कि पाताल लोक से लौटते समय हनुमानजी ने पौष कृष्ण अष्टमी के दिन उज्जैन (पृथ्वी के नाभि क्षेत्र) में विश्राम किया। इसके बाद से इस तिथि पर हनुमान अष्टमी पर्व मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई।

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शनि, मंगल और राहु के दुष्प्रभाव दूर करने में लाभकारी

ज्योतिष मान्यता है कि जब कुंडली में शनि, मंगल या राहु प्रतिकूल स्थिति में हों, तो जीवन में बाधाएं बढ़ने लगती हैं। हनुमानजी की उपासना इन ग्रहों के क्रूर प्रभाव को कम करती है।

  • हनुमान अष्टमी पर व्रत रखने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का असर कम होता है।
  • हनुमानजी को तेल और सिंदूर अर्पित करने से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं।
  • हनुमान अष्टक, हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति मिलती है।
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हनुमान अष्टमी की पूजा विधि

इस दिन हनुमानजी की विधि-विधान से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पूजा की सरल विधि इस प्रकार है—

  1. सुबह उठकर पहले श्रीराम का ध्यान करें, फिर हनुमानजी को प्रणाम करें।
  2. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और जल लेकर व्रत-संकल्प करें।
  3. घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें।
  4. लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करें।
  5. हनुमानजी को केसरिया चोला, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  6. चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करें।
  7. भोग में बूंदी के लड्डू चढ़ाएं।
  8. अंत में संकटमोचन हनुमानजी की आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
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