
वापी (गुजरात)। गुजरात के वलसाड जिले के वापी नगर से जैन समाज को शोकाकुल कर देने वाली खबर सामने आई है। राजस्थान के पिंडवाड़ा मूल की 27 वर्षीय पूज्य साध्वीजी श्री केवलदर्शीरेखाश्रीजी म.सा. का दुखद कालधर्म हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोचरी (आहार ग्रहण करने) के लिए अपार्टमेंट में गईं साध्वीजी के साथ यह हृदयविदारक घटना सीढ़ियों से नीचे उतरते समय हुई। उनके निधन से वापी जैन संघ सहित पूरे जैन समाज में शोक की लहर फैल गई।
गोचरी के लिए पहुंची थीं 10 मंजिला इमारत में
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूज्य साध्वीजी भगवंत वापी नगर में श्री अजितनाथ जिनालय के सामने स्थित श्राविका उपाश्रय में चातुर्मास के लिए विराजमान थीं। बताया गया है कि 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:30 बजे वे वापी के नाला रोड क्षेत्र में स्थित पार्श्व लब्धि अपार्टमेंट में गोचरी के लिए पहुंची थीं।
बताया जा रहा है कि गोचरी के बाद 10वीं मंजिल से सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतरते समय पानी की वजह से उनका पैर फिसल गया। इस दौरान सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट लगने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इसी घटना में सीढ़ियों पर ही उनका कालधर्म हो गया।
हालांकि, घटना की परिस्थितियों और चिकित्सकीय पुष्टि से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी की पुष्टि किया जाना शेष है।
वापस नहीं लौटीं तो गुरु माता ने कराई खोजबीन
जानकारी के अनुसार, जब पूज्य साध्वीजी गोचरी के लिए जाने के बाद वापस नहीं लौटीं, तो उनकी गुरु माता को चिंता हुई। इसके बाद अन्य साध्वी भगवंतों को उनकी तलाश के लिए भेजा गया। खोजबीन के दौरान घटना की जानकारी सामने आई।
बताया जाता है कि अपार्टमेंट में रहने वाले लोग सामान्यतः लिफ्ट का उपयोग करते हैं और सीढ़ियों से आवाजाही कम होती है। इसी वजह से घटना का पता समय पर नहीं चल पाने की बात कही जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच की।
आशी मेहता से साध्वी केवलदर्शीरेखाश्रीजी बनने तक का सफर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूज्य साध्वीजी का सांसारिक नाम आशी मेहता बताया गया है। उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाया और दीक्षा ग्रहण करने के बाद साध्वीजी श्री केवलदर्शीरेखाश्रीजी म.सा. के रूप में धर्माराधना में जीवन समर्पित किया।
बताया गया है कि उन्होंने लगभग 22 वर्ष की आयु में संयम जीवन स्वीकार किया था और करीब पांच वर्षों तक जैन धर्म की परंपराओं के अनुसार तप, त्याग और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ती रहीं।
कम उम्र में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर धर्म के मार्ग पर चलने वाली पूज्य साध्वीजी के कालधर्म का समाचार श्रद्धालुओं के लिए गहरा आघात है।
अंतिम पालखी यात्रा में उमड़े श्रद्धालु
पूज्य साध्वीजी भगवंत के कालधर्म की खबर फैलते ही वापी जैन संघ और आसपास के क्षेत्रों में शोक व्याप्त हो गया। अंतिम पालखी यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए। श्रद्धालुओं ने धार्मिक जयघोष के साथ पूज्य साध्वीजी को अंतिम विदाई दी।
इस दौरान “जय जय नंदा, जय जय भद्दा” का उच्चारण करते हुए श्रद्धालुओं ने दिवंगत साध्वीजी के प्रति श्रद्धा और भावनाएं व्यक्त कीं।
जैन समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
पूज्य साध्वीजी श्री केवलदर्शीरेखाश्रीजी म.सा. का जीवन संयम, त्याग और धर्माराधना को समर्पित रहा। उनके असामयिक कालधर्म से जैन समाज में गहरा दुख है। श्रद्धालु प्रभु श्री जिनेन्द्र से उनकी आत्मा के कल्याण और मोक्ष प्राप्ति की मंगलकामना कर रहे हैं।
प. पू. साध्वीजी श्री केवलदर्शीरेखाश्रीजी म.सा. की जीवन झलक
संसारी नाम : आशी मेहता
जन्म : विक्रम संवत २०५६ ,पौष वद १(मारवाडी );मागसर वद १ (गुजराती) तारीख़ – २३-१२-१९९९, गुरूवार .
जन्म स्थान – मुंबई
गाँव – पिंडवाडा -राजस्थान
दादा – श्री कांतिलालजी रिखबदासजी मेहता ( वर्तमान में परम पूज्य आयड़ तीर्थोद्धारक, वैराग्यवारिधि आचार्य श्री कुलचन्द्रसूरिश्वरजी महाराजा )
दादी – श्रीमती लक्ष्मीबाई कांतिलालजी मेहता
पिता- श्री कुमारपाल कांतिलालजी मेहता
मातुश्री- श्रीमती राखी कुमारपाल मेहता
दीक्षा – चैत्र सुद १३ संवत २०७७ सुरत , रविवार २५-०४-२०२१
दीक्षा दाता- परम पूज्य आयड़ तीर्थोद्धारक, वैराग्यवारिधि आचार्य श्री कुलचन्द्रसूरिश्वरजी महाराजा
गुरू – परम पूज्य साधवीजी श्री श्रुतार्थीरेखाश्रीजी म सा
वडी दीक्षा – वैशाख सुद ८ संवत २०७७ -सुरत, गुरूवार २०-०५-२०२१
कालधर्म – संवत २०८२ भादरवा वद १२ दिनांक ७/१०/२०२६ बुधवार वापी
पूज्यश्री के चरणो में कोटी कोटी वंदन




