CM साय के नेतृत्व में ‘हर घर जल’ का सपना साकार, डांडजमड़ी के हर घर पहुंचा साफ पानी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ संकल्प से बदली डांडजमड़ी की तस्वीर, सभी 90 घरों तक पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल जीवन मिशन से सुदूर गांवों में आ रहा बदलाव
रायपुर,
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर घर तक सुरक्षित और शुद्ध पेयजल पहुंचाने के संकल्प ने छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव लाना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के आकांक्षी विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत डांडजमड़ी के सभी 90 घरों में अब नल से शुद्ध पेयजल पहुंचने लगा है। कभी पानी के लिए दूर स्थित कुएं तक जाना यहां के ग्रामीणों की दिनचर्या का हिस्सा था, लेकिन अब घर के आंगन में नल से पानी मिलने की सुविधा ने विशेषकर महिलाओं और परिवारों के जीवन को अधिक सहज बनाया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण भारत के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाते हुए दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। डांडजमड़ी की उपलब्धि इसी अभियान के जमीनी असर की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
घर में नल आया तो दूर हुई वर्षों की परेशानी
डांडजमड़ी की ग्रामवासी श्रीमती ललिता वाकरे के लिए घर में नल से पानी आना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की एक बड़ी परेशानी से मुक्ति है। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि पहले पानी लेने के लिए उन्हें घर से दूर स्थित कुएं तक जाना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों लगते थे। अब घर में ही नल से शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। इससे परिवार की दिनचर्या आसान हुई है और पानी की चिंता भी कम हुई है।
ललिता वाकरे का अनुभव उस बदलाव की कहानी है, जो जल जीवन मिशन देश के गांवों में ला रहा है। ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम से राहत मिलने के साथ ही स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक बन रही है।
सभी 90 परिवारों के घर तक पहुंचा नल से जल
जल जीवन मिशन के तहत डांडजमड़ी पंचायत के सभी 90 घरों तक नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है। इस व्यवस्था को स्थायी और स्थानीय सहभागिता पर आधारित बनाने के उद्देश्य से योजना के संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी गई है। इस पहल के माध्यम से गांव को केवल पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को जल स्रोतों के संरक्षण और उपलब्ध पानी के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
पानी मिला है तो उसे बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी
ग्राम पंचायत के सरपंच इंजोर सिंह धुर्वे, पंचायत सचिव रतन सिंह, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों तथा ग्रामवासियों को जल की उपयोगिता, जल प्रबंधन, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई है। ग्रामीणों को यह समझाया गया है कि हर घर तक नल से पानी पहुंचने के साथ जल स्रोतों को सुरक्षित रखना और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना भी सामुदायिक जिम्मेदारी है।
जल जीवन मिशन की अवधारणा में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। स्थानीय स्तर पर संचालन एवं संधारण की व्यवस्था से ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित होने के साथ पेयजल व्यवस्था को दीर्घकाल तक सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
विकसित भारत की बुनियाद मजबूत कर रहा ‘हर घर जल’
केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन केवल पाइपलाइन बिछाने या घरों में नल लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण परिवर्तन है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता गांवों में बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में आधारभूत भूमिका निभाती है। इसके साथ ही पानी जुटाने में लगने वाले समय की बचत ग्रामीण महिलाओं और परिवारों के दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में मिशन के क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच मजबूत हो रही है। आकांक्षी विकासखंड गौरेला का डांडजमड़ी गांव इसका उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां सभी 90 परिवार अब अपने घर में नल से शुद्ध पेयजल प्राप्त कर रहे हैं।
डांडजमड़ी में नल से बहती पानी की हर धार केवल एक सरकारी योजना की उपलब्धि नहीं है। यह उस ग्रामीण परिवार के लिए राहत है, जिसे अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता; उस महिला के लिए समय की बचत है, जिसकी दिनचर्या कभी पानी जुटाने से शुरू होती थी; और उस गांव के लिए बदलाव का प्रतीक है, जो अब जल संरक्षण की जिम्मेदारी के साथ अपने भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




