राजनांदगांव : चातुर्मास प्रवचन : जीवन में धैर्य का होना जरूरी है…
राजनांदगांव | ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में सोमवार को खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर शिष्य मुनि श्रेयांश प्रभ सागर ने कहा कि धैर्य होना जरूरी है। धैर्य यदि नहीं है तो मिलने वाली चीज भी हाथ से निकल जाती है। यदि हम कुआं खोदते हैं और हमें 80 फीट में पानी का स्रोत मिलने वाला है किंतु 60 फीट में ही हमारा धैर्य खो जाता है तो फिर हम पानी के स्त्रोत को नहीं पा सकते।
हमारे मन में धीरज रहना चाहिए। धीरज है तो समता है। इसलिए हमें हर परिस्थिति में धैर्यवान होना चाहिए। यदि कोई आपके धैर्य को तोड़ने का प्रयास करता है तो भी डटे रहिए, किसी भी हालत में धैर्य न खोएं। सब्र का फल मीठा होता है। भले ही फल मिलने में समय लगे लेकिन लाभ तो मिलेगा ही। जो सबके लिए करते हैं उन्हें ज्यादा फल मिलता है। मुनिश्री ने कहा कि किसी भी चीज तक पहुंचने के लिए एक निश्चित समय लगता है। अगर जल्दी पहुंचना है तो स्पीड बढ़ानी होगी। किंतु निश्चित समय में ही आप उस चीज को प्राप्त कर सकेंगे।




