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ICMR की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, COVID के बाद बिगड़ी नींद की आदतें; शहरों में स्लीपिंग पिल्स की बिक्री बढ़ी

By Admin|07 Jul 2026, 10:03 AM
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जबलपुर 

 भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है।

एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं।

शरीर की जैविक जरूरत
मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं।

सेहत पर असर
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है।

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अनिद्रा के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं-

डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग।

बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं।

सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव।

नींद लाने के लिए करें ये काम
-समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें।
-भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता
-रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है।
-शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें।
-सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
-बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।

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