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बिहार में बाढ़ से हालात गंभीर, गंडक-बागमती के बढ़े जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

By Admin|29 Sep 2026, 3:12 PM
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पटना
बिहार के कई जिले बाढ़ का कहर झेल रहे हैं। खासकर गंडक नदी ने बड़ी तबाही ला दी है। अब मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली तीनों प्रमुख नदियों का जलस्तर चिंताजनक बना हुआ है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा आज मंगलवार सुबह 6 बजे जारी दैनिक जलस्तर एवं बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़े के अनुसार, गंडक नदी रेवाघाट में खतरे के निशान पर पहुंच गई है, जबकि बागमती नदी दो स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है।

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रेवाघाट (गंडक) – खतरे के निशान पर, बढ़ोतरी जारी
गंडक नदी का उच्चतम जलस्तर 55.46 मीटर (वर्ष 2020) है। इसका खतरे का निशान 54.41 मीटर है। आज सुबह 6 बजे यह ठीक 54.41 मीटर पर पहुंच गई है और बढ़ने की प्रवृत्ति में है। यानी अगले कुछ घंटों में यह लाल निशान को पार कर जाएगी। इससे साहेबगंज और पारू प्रखंड में चिंता की स्थिति बन रही है।

कटौझा (बागमती) – 1.30 मीटर ऊपर, पर अब घट रही
बागमती नदी का कटौझा में खतरे का निशान 55.00 मीटर है, जबकि आज का जलस्तर 56.30 मीटर है। यह खतरे से 1.30 मीटर ऊपर है। हालांकि राहत की बात है कि इसकी प्रवृत्ति घटने की है। उच्चतम स्तर 58.34 मीटर (2024) से अभी नीचे है।

बेनीबाद (बागमती) – 1.24 मीटर ऊपर, स्थिर
बेनीबाद में बागमती का खतरे का निशान 48.68 मीटर है। आज का स्तर 49.92 मीटर है, जो खतरे से 1.24 मीटर ऊपर है। प्रवृत्ति स्थिर है। इससे कटरा और गायघाट प्रखंड के तटबंध पर दबाव बना हुआ है। इसका सर्वकालिक उच्च स्तर 50.12 मीटर (2025) है।

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सिकंदरपुर (बूढ़ी गंडक) – खतरे से नीचे, पर बढ़ रही
शहर के बीच से गुजरने वाली बूढ़ी गंडक सिकंदरपुर में खतरे के निशान 52.53 मीटर से नीचे है। आज का स्तर 48.90 मीटर है, लेकिन यह बढ़ने की प्रवृत्ति में है। लगातार हो रहीl बारिश के अब थमने से थोड़ी राहत मिली है। इसका उच्चतम स्तर 54.29 मीटर (1987) रहा है।

गंडक बराज की क्या है स्थिति
बता दें कि वाल्मिकीनगर स्थित गंडक बराज पर नदी का जलस्त्राव 13 घंटे तक 5 लाख क्युसेक से अधिक तथा 32 घंटे तक 4 लाख क्युसेक से अधिक बना रहा। दिनांक 26 एवं 27, सितम्बर के बीच बिहार स्थित गंडक नदी के सीमावर्ती जिलों यथा पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण एवं गोपालगंज में भी काफी अधिक वर्षापात हुई है, जिसके कारण गंडक बराज के निम्नप्रवाह में नदी का जलस्तर पूर्व से ही बढ़ा हुआ है। इस बार बराज से प्रवाहित जलस्त्राव कुछ कम रहने के बावजूद नदी द्वारा बगहा गेजस्थल पर 91.25 मीटर का अब तक का नया उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया है, जो पूर्व के उच्चतम जलस्तर 90.90 मीटर (वर्ष 2024) से 0.35 मीटर अधिक है।

गंडक नदी से प्रवाहित अत्यधिक जलस्त्राव के फलस्वरुप नदी पर निर्मित तटबंधों पर भारी दबाव की स्थिति बनी हुई है तथा कई स्थलों पर सीपेज, पाईपिंग एवं ओवर-टाॅपिंग की समस्या भी उत्पन्न होती रही। अभी तक 169 बिन्दुओं पर हुए सीपेज/पाईपिंग को तत्काल कार्य कराते हुए सुरक्षित किया गया है। गंडक नदी के बढ़े हुए जलस्तर के कारण 28-29, सितम्बर के मध्यरात्रि में, पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत, गंडक नदी के बांयें तट पर निर्मित चम्पारण तटबंध 02 स्थलों पर (1. ग्राम-खैरतवा, प्रखंड-बगहा-1 एवं 2. ग्राम-फुलियाखाड़, प्रखंड-बैरिया) क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश प्रभाग में कुशीनगर जनपद अंतर्गत गंडक नदी के दायें तट पर निर्मित तटबंध एक स्थल पर क्षतिग्रस्त हुआ है।

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