करोड़ों खर्च, फिर भी सड़कें बदहाल – अशोक फड़नवीस

➡️ डामरीकरण की गुणवत्ता पर सवाल, डॉ. रमन सिंह से जांच और दोषी ठेकेदारों-अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
राजनांदगांव।
शहर की सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व पार्षद अशोक फड़नवीस ने निगम प्रशासन और सड़क निर्माण से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष में शहर की सड़कों के डामरीकरण और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन इसके बावजूद अनेक प्रमुख सड़कों की हालत बद से बदतर हो गई है। कहीं सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं तो कहीं डामर उखड़ने से सड़क पर बजरी फैल रही है और बारिश के बाद धूल से नागरिक परेशान हैं।
श्री फड़नवीस ने कहा कि सड़क निर्माण और डामरीकरण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही संबंधित ठेकेदारों के लिए वारंटी की शर्तें भी स्पष्ट होनी चाहिए थीं। यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क उखड़ने लगे तो इसकी जवाबदेही ठेकेदार और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि घटिया डामरीकरण के मामलों में संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय कई स्थानों पर दोबारा काम क्यों कराया गया।
श्री फड़नवीस ने शहर के व्हीआईपी सर्किट हाउस मार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मार्ग पर गड्ढे, धूल और उखड़े हुए डामरीकरण की बजरी वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि दो वर्षों में दो बार डामरीकरण किए जाने के बावजूद सड़क की स्थिति संतोषजनक नहीं है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि जब किसी सड़क का निर्माण या डामरीकरण कराया जाता है तो उसकी गुणवत्ता की जांच और निगरानी के लिए तकनीकी अधिकारी जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में सड़क बनने के कुछ ही समय बाद यदि डामर उखड़ने लगे और गड्ढे बन जाएं तो यह जांच का विषय है कि आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
श्री फड़नवीस ने कहा कि राजनांदगांव शहर में केवल नगर निगम की ही नहीं बल्कि NHAI और PWD के अंतर्गत आने वाली कई सड़कों की स्थिति भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि तीनों विभागों से जुड़ी सड़कों पर नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि जनता को गड्ढे और धूल ही मिल रही है तो इसके लिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
उन्होंने मांग की कि जिन ठेकेदारों द्वारा सड़कों का निर्माण या डामरीकरण कराया गया है, यदि उनकी वारंटी अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है तो उन्हीं से सड़क की मरम्मत कराई जाए। इससे सरकारी राशि पर दोबारा अतिरिक्त भार डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। श्री फड़नवीस ने सड़क निर्माण की तकनीकी स्वीकृति और कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केवल ठेकेदार को जिम्मेदार बताकर मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता।
यह भी जांच होनी चाहिए कि कार्य की तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई, गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई और भुगतान से पहले अधिकारियों ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किस प्रकार किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी सड़क की गुणवत्ता खराब है और इसके बावजूद उसका बिल पास किया गया है तो संबंधित तकनीकी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी कार्यालय में बैठकर केवल कागजी कार्रवाई और बिलों की प्रक्रिया पूरी कर देते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर सड़क की वास्तविक स्थिति की निगरानी नहीं हो पाती। श्री फड़नवीस ने कहा कि राजनांदगांव विधानसभा अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक डॉ. रमन सिंह का क्षेत्र है।
उन्होंने मांग की कि डॉ. रमन सिंह इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर शहर की प्रमुख सड़कों के निर्माण और डामरीकरण की गुणवत्ता की जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सड़क निर्माण में खर्च हुई राशि, ठेकेदारों की वारंटी, तकनीकी स्वीकृति, गुणवत्ता परीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
श्री फड़नवीस ने कहा कि बारिश के दौरान शहरवासियों को गड्ढों से होकर वाहन चलाने में परेशानी होती है और बारिश थमने के बाद इन्हीं सड़कों से उड़ने वाली धूल लोगों के लिए परेशानी बन जाती है। उन्होंने कहा कि सड़कें नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में जनता को सुविधा के बजाय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क मरम्मत के लिए बजट या राशि का इंतजार करना उचित नहीं होगा। जिन सड़कों की हालत खराब है, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जानी चाहिए।
साथ ही घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकना जरूरी है। श्री फड़नवीस ने कहा कि शहर की जनता यह जानना चाहती है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें क्यों नहीं टिक पा रही हैं और खराब गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों तथा तकनीकी अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई और शहर की सड़कों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।




